झारखंड में चक्रवाती तूफान के एक नवंबर से कमजोर पड़ने की संभावना

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Eksandeshlive Desk

रांची : बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान मोंथा के कारण झारखंड के अधिकांश जिलों में बारिश हो रही है। बारिश के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और ठंड में वृद्धि हुई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि मध्य छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों पर स्पष्ट रूप से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान मोंथा उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ गया है। यह उत्तरी छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों पर स्थित है। इसके पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे पश्चिमी झारखंड से होते हुए उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बिहार की ओर बढ़ने और शनिवार तक धीरे-धीरे कम दबाव वाले क्षेत्र में कमजोर होने की संभावना है। इससे झारखंड के विभिन्न जिलों में मौसम में सुधार होने की संभावना है।

सोनुवा में 75 मिमी बारिश रिकॉर्ड : वहीं तूफान मोंथा के चलते राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। 24 घंटे के दौरान सबसे अधिक बारिश पश्चिमी सिंहभूम के सोनुवा में 75 मिमी रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा झारखंड के जिन इलाकों में बारिश रिकार्ड की गई उनमें रांची में 10 मिमी, झिकपानी में 73.8 मिलीमीटर, जरमुंडी 48.2 मिमी, महेशपुर में 46, फतेहपुर में 40.8, पाकुरिया में 40.2, बहरागोरा और पुटकी में 38.2 मिमी, रामगढ़ में 33.4, मैथन में 33.1 मिमी और घातशिला में 32.6 मिमी सहित राज्य के अन्य इलाकों में बारिश रिकॉर्ड की गई। पिछले 24 घंटों के दौरान झारखंड में सबसे अधिक तापमान पाकुड़ में 32.3 डिग्री और सबसे कम तापमान लातेहार में 19.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इस दौरान रांची में अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री जमशेदपुर में 28.6, डाल्टनगंज में 28.8, बोकारो में 28.1 और चाईबासा में अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

चक्रवाती तूफान मोंथा का कहर, चिंता में किसान : वहीं हजारीबाग जिले में चक्रवाती तूफान मोंथा का व्यापक असर देखा जा रहा है। बुधवार रात से शुरू हुई तेज हवा और लगातार बारिश के कारण जिले के ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही हुई है। खेतों में खड़ी धान की तैयार फसल और नई बोई गई आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि प्रधान क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष अच्छे मानसून के कारण किसानों ने धान की खेती में काफी निवेश और मेहनत की थी। फसल कटाई के लिए तैयार थी, तभी तूफान के साथ आई तेज हवा और मूसलाधार बारिश ने खेतों में पानी भर दिया। कई स्थानों पर धान की बालियां गिरकर सड़ने लगी है। आलू की बुआई करने वाले किसानों की स्थिति भी गंभीर है। जलभराव और लगातार नमी के कारण आलू के बीज के भी सड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही बढ़ती महंगाई और लागत से जूझ रहे थे, अब यह प्राकृतिक आपदा उनकी आर्थिक स्थिति को और खराब कर देगी। इसी को लेकर किसानों में चिंता देखी जा रही है।

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