10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला का समापन
पुस्तक मेल में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागी पुरस्कृत
Eksandeshlive Desk
रांची: स्थानीय जिला स्कूल मैदान में समय इंडिया नई दिल्ली तत्वावधान में जारी 10 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला का विधिवत समापन हो गया। समापन झारखंड सरकार के गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के उद्बोधन से हुआ। अपने वक्तव्य में उन्होंने पुस्तकों को पाठकों से जोड़ने की इस रचनात्मक मुहीम की प्रशंसा की और इसे आगे भी जारी रखने पर बल दिया। पुस्तकें व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मोबाइल की आभासीय दुनिया से नई पीढ़ी को बचाने के लिए पुस्तकों को उनके करीब लाना बहुत जरूरी है।
मुख्य अतिथि का मेला परिसर में स्वागत समय इंडिया के प्रबन्ध न्यासी चन्द्र भूषण ने ‘बुके नहीं बुक’ की परम्परानुसार बुक भेंट देकर किया। उन्होंने मुख्य अतिथि राजीव रंजन को मेला परिसर में लगे स्टाॅल्स का अवलोकन कराया और आयोजन के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर दूरदर्शन के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. भूपेन्द्र नारायण सिंह ने अभिभावकों को वर्ष में बच्चों को कम से कम चार पुस्तकें खरीदकर उनकी रुचि के अनुसार देने का आह्वान किया। मौके पर वासुदेव प्रसाद, निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, डॉक्टर ए. के. लाल, डॉक्टर जंग बहादुर पांडेय आदि भी मौजूद थे। मेला आयोजक और समय प्रकाशन समूह के सीईओ चंद्र भूषण ने झारखंड के सभी 24 जिलों में पुस्तक मेला लगाने की घोषणा की और सरकार से सहयोग का भी आह्वान किया।
विजयी प्रतिभागी पुरस्कृत : पुस्तक मेले के दौरान किताबें के बीच बच्चों में रचनात्मक प्रतिभा के विकास के लिए विविध शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलाया गया। इसी कड़ी में प्रतिदिन बच्चों पर केन्द्रित कार्यक्रम जिनमें लोकगीत, देशभक्ति गीत, गायन, चित्रकला, कविता सुनाओ कहानी लेखन, नृत्य प्रतियोगिता, एकल नाट्य और बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं भी सम्पन्न हुईं। इन सभी प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को केन्द्रीय मंत्री शिल्पी नेहा तिर्के ने अपने हाथों से प्रमाण पत्र और उपहार देकर पुरस्कृत किया।
पुस्तक मेला कुएं का प्यासे के करीब आना: राष्ट्रीय पुस्तक मेला के संयोजक एवं समय इंडिया के प्रबंध न्यासी, वरिष्ठ लेखक-पत्रकार चन्द्र भूषण ने पुस्तक मेले की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया कि रांची के इस जिला स्कूल मैदान में प्रतिवर्ष किताबों का मेला लगना इस बात का सबूत है कि पुस्तक प्रेमियों के दिल में किताबों के लिए जगह है। जीवन की आपाधापी में उलझे होने के नाते किताबों तक आने और पढ़ने का वक्त उन्हें नहीं मिल रहा है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किताबों की पठनीयता खत्म हो गई है। जब भी ऐसे मेले लगते हैं भारी संख्या में युवा और पुरानी पीढ़ी के लोग अपनी पसन्द की पुस्तकों की तलाश में आते हैं और खरीदते भी हैं। यह सिलसिला पहले भी जारी था और आज भी है। यदि हम व्यावसायिक मोर्चे मेले की सफलता-असफलता के आंकड़ों की बाजीगरी में न उलझ कर साफ तौर देखें तो पुस्तक प्रेमियों का समय निकाल कर किताबों के करीब आना और अपनी रुचि की किताबें खरीदना पुस्तक व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। अपने-अपने सेन्टर पर बैठे व्यवसायियों को 10 दिनों में भारी संख्या में पुस्तक प्रेमियों से मिलने और संवाद का अवसर शायद ही उपलब्ध होगा। पुस्तक मेले के आयोजन के पीछे आखिर संस्था की मंशा यही है कि किताबों और पाठकों के बीच की टूटी हुई कड़ी को जोड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक मेला एक तरह से कुएं का प्यासे के करीब आना है। ज्ञान का सागर आपके बीच उपस्थित है अब आपके हिस्से में है कि सागर से मोती चुन लें। पुस्तक मेले का अगला पड़ाव: पुस्तकों को पाठकों से जोड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। रांची के बाद समय इंडिया का अगला पड़ाव इन्दौर (मध्यप्रदेश) होगा जहाँ 30 जनवरी से 8 फरवरी, 2026 तक किताबों की अनोखी दुनिया सजेगी।
