लोकसभा में नहीं पारित हो पाया संविधान संशोधन विधेयक, सरकार ने कहा- जारी रहेगा महिलाओं को आरक्षण देने का अभियान

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : लोकसभा में शुक्रवार को सरकार की ओर से लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक जरूरी दो तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो पाया। इसके माध्यम से सरकार लोकसभा की सीटों में वृद्धि करना और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती थी। विपक्ष का कहना था कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाकर अपना राजनीतिक हित साधना चाहती है। लोकसभा में दो दिन तक संविधान संशोधन और दो अन्य परिसीमन और संघ शासित राज्य संशोधन विधेयक पर एक साथ चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर विपक्ष से इसे पारित कराने की अपील भी की थी। गृह मंत्री ने यहां तक आश्वासन दिया था कि अगर विपक्ष साथ दे तो सरकार राज्यों में 50 प्रतिशत सीट बढ़ोतरी का आश्वासन देने के लिए विधेयक में तत्काल संशोधन को भी तैयार है।

लोकसभा में देर शाम तक चर्चा के बाद संविधान संशोधन होने के कारण आवश्यक मत विभाजन हुआ। इसमें विधेयक के पक्ष में 298 और विधेयक के विरोध में 230 मत पड़े। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को सदन में मौजूद दो तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिये था। संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के कारण इससे जुड़े दो विधेयकों को भी सरकार ने वापस ले लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने इस एतिहासिक अवसर पर सरकार का साथ नहीं दिया। सरकार ने अभी केवल एक मौका गंवाया है और महिलाओं को अधिकार दिलाने का सरकार का अभियान जारी रहेगा।इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही बाद शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अंतरआत्मा की आवाज सुनकर वोट करने की अपील की थी। लगता है कि विपक्ष में आत्मा नदारद है और विपक्ष निष्ठुर राजनीति कर रहा है। वे केवल महिला आरक्षण का इसलिए विरोध कर रहा है कि कहीं इसका श्रेय सत्तापक्ष को न मिल जाए। विपक्ष को महिलाओं की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। शाह ने कहा, “रामसेतु में जिस गिलहरी ने योगदान दिया था, उसे देश आज भी पूजता है। और हवन में हड्डियां डालने वाली ताड़का को भी देश याद रखता है। महिलाओं को आरक्षण देने के यज्ञ में विरोध की हड्डी डालने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।”

शाह ने अपने भाषण में कहा कि महिलाओं का संबल बढ़ाने, विधायी संस्थाओं में उन्हें हिस्सा देने के लिए जितना विरोध का सामना करना पड़े, हम करेंगे, लड़ेंगे और उन्हें आरक्षण देकर रहेंगे। अमित शाह ने कहा कि सरकार के हर बड़े फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। अनुच्छेद 370, राम मंदिर, तीन तलाक, ऑपरेशन सिंधूर जैसे फैसलों का विरोध किया है। यह पांचवीं बार होगा जब महिलाओं को उनके अधिकार से जुड़े विधेयक को लागू होने से रोका जा रहा है। शाह ने एक तरफ मुस्लिम आरक्षण के विरोध की बात कही और दूसरी ओर कांग्रेस पर अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ नाइंसाफी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में 27 मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं। यह मंत्रिपरिषद का 40 प्रतिशत होता है। हमारी सरकारों के ही दौरान कई राज्यों में पहली बार महिला मुख्यमंत्री बनीं।

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