माता-पिता की सेवा करने वाली संतान को मिलती है जीवन में सुख और समृद्धि : प्रदीप मिश्रा

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By Sunil Verma

रांची: कांके के सुकुरहुटू फुटबॉल मैदान में श्री शिवाला सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार एवं जीवन मूल्यों से जुड़े अनेक प्रेरणादायक संदेश प्राप्त हुए।
कथा के दौरान व्यासपीठ से पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मंत्र बीज के समान होते हैं। यदि जप में थोड़ी त्रुटि भी हो जाए तो चिंता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि श्रद्धा और भाव से किया गया मंत्र जाप अपना प्रभाव अवश्य दिखाता है। जैसे भूमि पर गिरा बीज अपने स्वभाव से अंकुरित होता है, वैसे ही मंत्र भी समय आने पर फल प्रदान करता है।व्यासपीठ से माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा गया कि माता-पिता के चरणों में ही सच्चा तीर्थ निवास करता है जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा करती है, उसके जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है।कथा में यह भी बताया गया कि भगवान शिव को अर्पित शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल से किसी भी प्रकार की नजर दोष और नकारात्मक प्रभाव को दूर किया जा सकता है। साथ ही श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों का सम्मान करने एवं घर में पूर्वजों की तस्वीर लगाने की प्रेरणा दी गई।इस अवसर पर शिव महापुराण में वर्णित चंचुला की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि किस प्रकार पापमय जीवन जीने वाली चंचुला ने शिव महापुराण का श्रवण कर अपने जीवन को परिवर्तित किया और शिवभक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चे पश्चाताप, सत्संग एवं शिवभक्ति से सबसे बड़े पापी का भी उद्धार संभव है।कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ कथा श्रवण किया और भगवान शिव के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कथा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया।

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