Eksandeshlive Desk
काठमांडू : राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के प्रथम राष्ट्रीय महाधिवेशन के उद्घाटन समारोह में पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की कार्यशैली और सरकार के प्रति अपना मजबूत समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार चलाने की पूरी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है और सत्ता संचालन में उनकी व्यक्तिगत रुचि नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पहले ही सरकार को आवश्यक राजनीतिक शक्ति और समर्थन प्रदान कर चुकी है तथा अब विकास और सुशासन के लक्ष्यों को हासिल करने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। महाधिवेशन को संबोधित करते हुए लामिछाने ने कहा कि चुनाव से पहले ही उनकी पार्टी ने बालेन्द्र शाह के नेतृत्व पर भरोसा जताया था और उन्हें आगे बढ़ने की पूरी ताकत दी थी। उन्होंने खेल की भाषा में अपनी बात रखते हुए कहा कि अब “गोल करने की जिम्मेदारी” प्रधानमंत्री की है। यदि किसी कारणवश जिम्मेदारी उनकी ओर आती भी है, तो वे उसे पुनः प्रधानमंत्री को सौंपने का कार्य करेंगे। उन्होंने आलोचकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो चापलूसी या चुगली के माध्यम से माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को जवाब देना नहीं, बल्कि इतिहास और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाना है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भी सरकार की कार्यशैली का किया बचाव : इस अवसर पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भी सरकार की कार्यशैली का बचाव करते हुए अपनी सरकार की तुलना एक्सप्रेस-वे पर दौड़ती हुई गाड़ी से की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी स्थानीय मार्ग पर चलने वाली धीमी गाड़ी नहीं है, बल्कि एक तेज रफ्तार विकास यात्रा पर निकली सरकार है, जिसे मंजिल तक पहुंचने से पहले अनावश्यक रूप से रोकने या ब्रेक लगाने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री का यह बयान उस टिप्पणी के संदर्भ में आया जिसमें यूएमएल नेता प्रदीप ज्ञवाली ने कहा था कि यदि समय रहते सरकार ने सावधानी नहीं बरती तो उसकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है। शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार पूरी तरह नियंत्रण में है और विकास के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार लोकल रूट की गाड़ी नहीं, बल्कि एक्सप्रेस रूट की गाड़ी है। ब्रेक तब लगेगा जब हम अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे। उससे पहले रुकने का कोई कारण नहीं है। हमारी सरकार नियंत्रण से बाहर नहीं है और सभी निर्णय सुनियोजित तरीके से लिए जा रहे हैं।” राजनीतिक विचारधारा को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि उनकी पार्टी को पारंपरिक ‘दक्षिणपंथ’ और ‘वामपंथ’ की परिभाषाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मूल उद्देश्य विकास, प्रगति और जनहित है। उन्होंने कहा, “हम न तो राइट हैं और न ही लेफ्ट। हम विकासवादी सोच वाली पार्टी हैं। हमारा उद्देश्य आगे बढ़ना है, न कि प्रतिशोध की राजनीति करना या पुराने विवादों को पुनर्जीवित करना।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और प्रशासन के मामलों में सरकार किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी। यदि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार जैसे मामले सामने आते हैं, तो निष्पक्ष जांच की जाएगी और आवश्यक होने पर लंबी पूछताछ भी की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा, “जरूरत पड़ी तो पांच घंटे नहीं, पांच साल तक भी पूछताछ की जा सकती है, लेकिन सब कुछ कानून के दायरे में होगा। सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिखाई जाती है, उससे अलग वास्तविकता यह है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
महाधिवेशन में रवि लामिछाने ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता भी दोहराई : उन्होंने कहा कि रास्वपा प्रतिशोध और अहंकार की राजनीति से ऊपर उठकर नागरिक उत्तरदायित्व निभाने में विश्वास करती है। उन्होंने मंच से कहा, “निश्चिंत रहिए, देश बालेन्द्र शाह के हाथों में सुरक्षित है।” लामिछाने ने यह भी कहा कि लोकतंत्र, संविधान, संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र, मानवाधिकार, नागरिक अधिकार और समावेशी समाज जैसी उपलब्धियां देश की राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं और उनकी पार्टी इन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के बाद रास्वपा नेताओं ने कहा कि लामिछाने और प्रधानमंत्री शाह के बयानों ने सरकार तथा पार्टी की दिशा को लेकर उठ रही कई आशंकाओं को दूर किया है। पार्टी के सांसद गणेश कार्की ने कहा कि दोनों नेताओं के वक्तव्य अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी संदेश देने वाले हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि सरकार विकास और सुशासन के एजेंडे पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाधिवेशन में दिए गए इन बयानों से सरकार के अधिक आत्मविश्वास के साथ काम करने और विकास कार्यक्रमों को गति देने के संकेत मिले हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि रास्वपा नेतृत्व सरकार के प्रति अपना समर्थन बनाए रखने के पक्ष में है।
