राज परिवार के स्तंभ व समाजसेवी भगवान शेखर सिंह का निधन, हुआ अंतिम संस्कार

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By Mustaffa

​मेसरा (रांची): बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र के मेसरा गांव निवासी राज परिवार के मजबूत स्तंभ,माँ रक्षा काली मंदिर के प्रबंधक एवं वरिष्ठ समाजसेवी भगवान शेखर सिंह(65) का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे मेसरा और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। दिवंगत आत्मा के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर सर्वसमाज के लोगों का तांता लगा रहा। शनिवार सुबह 10 बजे उनके पैतृक निवास से शवयात्रा निकाली गई,जिसके बाद हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार रांची के हरमू स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पारिवारिक सूत्रों (छोटे भाई वृन्दा शेखर व भतीजा अमर शेखर) के मुताबिक,बिते सोमवार सुबह 11 बजे उन्हें इलाज के लिए टाटा स्थित मैडीट्रैन अस्पताल ले जाया गया था। मंगलवार को डॉक्टरों द्वारा उन्हें स्टेंट लगाया गया,लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार की शाम करीब 6:50 बजे उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। रात करीब 12:30 बजे उनके पार्थिव शरीर को मेसरा स्थित आवास पर लाया गया। भगवान शेखर सिंह के निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। भाई वृन्दा शेखर ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि अभी ठीक से तीन महीने भी नहीं गुजरे थे जब उनकी भाभी (भगवान शेखर की पत्नी चंचला देवी) का निधन हुआ था। पत्नी के वियोग के गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि अब बड़े भाई भी दुनिया छोड़ गए। दिवंगत भगवान शेखर सिंह अपने पीछे दो पुत्रियां-शिल्पा शेखर (33 वर्ष) व सुमन शेखर (24 वर्ष) और चार भाइयों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके सामाजिक और धार्मिक योगदान को याद करते हुए क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को ढाढ़स बंधाया। श्रद्धांजलि देने वालों में मुख्य रूप से विधायक सुरेश बैठा,जिला परिषद सदस्य संजय कुमार महतो,प्रमुख सोमनाथ मुंडा,थाना प्रभारी अजय कुमार दास,वरिष्ठ समाजसेवी मनरखन महतो,राधाचरण सिंह,हाजी हेयात,अनिल लिंडा,नसीमुद्दीन अंसारी,पूर्व मुखिया गंगा करमाली,मुखिया साधो उरांव,पूर्व पंसस रीता देवी,मुस्ताक अंसारी,प्रमोद पांडे,बालमुकुन्द सिंह,प्रकाश महतो,इमामुल अंसारी,सत्येन्द्र सिंह,प्रेमलाल चौधरी,जाकिर अंसारी,सोहराय महतो,श्रवण करमाली,विशाल सिंह,प्रीतम लोहरा,शिवलाल महतो,विजय केशरी,कृष्णा महतो और मुकेश ठाकुर समेत मेसरा व आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे। सभी ने इसे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।

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