Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गुरुवार देशवासियों को विश्वास दिलाया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की की पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से लिए जा रहे निर्णय में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। फास्ट ट्रैक कोर्ट से संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (आआपा) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान की आलोचना की। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार ने मिलकर के देश के युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया और इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
युवाओं पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन मांगें रखी है, पहला धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं जाए, दूसरा छात्रों से माफी मांगे और तीसरा छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही आआपा के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए इसे छात्रों के आंदोलन को दबाने की ‘लीपापोती’ करार दिया और मांग की कि सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के बजाय पेपर लीक के इस पूरे रैकेट और इसमें शामिल बड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज सुबह प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट तो पहले ही बहुत बने थे, पोक्सो के लिए, रेप केस जैसे कई मुद्दों पर बने हैं लेकिन उनमें सुनवाई तो होती नही है। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सारी बाते कही लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बीत क्यों नहीं की। केजरीवाल ने दुख जताते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ प्रदर्शन में जो व्यवहार किया गया उस पर सरकार चुप क्यों थी, कोई भी कार्रवाई क्यों नहीं किया गया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हर साल पेपर लीक का मामला सामने आता है लेकिन प्रधानमंत्री ने एक भी ऐसी बात नहीं की कि अगले साल नीट पेपर लीक नहीं होगा। विपक्ष ने सरकार से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और युवाओं पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़े मामलों पर आंदोलन जारी है। छात्रों की प्रमुख मांग देश के शिक्षामंत्री इस्तीफा दें।
सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को नष्ट किया, छात्रों की मांगें माने सरकार : जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा प्रणाली पर कब्जा होने और उसके पतन को बढ़ावा दिया है। उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी मांगने और छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को नष्ट होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की है। दूसरी मांग छात्रों से माफी मांगने की है। तीसरी मांग उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन्होंने छात्रों के साथ हिंसा की। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। इन मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है और सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
सोनम वांगचुक की पत्नी ने छात्रों पर लग रहे आरोपों को लेकर जताई चिंता
पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर लगाए जा रहे आरोपों पर चिंता जाहिर की है। गीतांजलि आंग्मो ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, “एक शिक्षक के तौर पर, मीडिया में अपने छात्रों की छवि खराब होते देखना मेरे लिए बहुत दुखद है। ये छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों को दोषी ठहराने के बजाए उनकी चिंताओं को सुनना चाहिए था। हमारे बच्चे सुरक्षा के हकदार हैं, न कि उन्हें विलेन के तौर पर दिखाए जाने के। उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।” उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अगर दिल्ली में कहीं और हिंसा की खबरें आती हैं, तो कृपया बिना सबूत के उन्हें इस आंदोलन से न जोड़ें जो लोग इन युवाओं को सच में जानते हैं, उन्होंने इनका असाधारण धैर्य, अनुशासन और संयम देखा है। उल्लेखनीय है कि छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च की घोषणा के बाद 20 जुलाई को हजारों की संख्या में एकजुट हुए छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन जताय़ा था जिसमें वे शिक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और पेपर लीक मामले को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उसी दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गई। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।
सीजेपी प्रदर्शन से जोड़कर एनएसए के कथित आदेश पर दिल्ली पुलिस ने दिया स्पष्टीकरण
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस ने गुरुवार को स्पष्ट किया है कि दिल्ली पुलिस आयुक्त को एनएसए के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की शक्तियां सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने या उससे निपटने के लिए नहीं दी गई हैं। यह आदेश पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे हर तीन महीने में नवीनीकृत किया जाता है। पुलिस के अनुसार कुछ मीडिया संस्थानों ने खबर प्रकाशित की थी कि सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस आयुक्त को एनएसए के तहत गिरफ्तारी और निरोध की शक्तियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने इन रिपोर्टों को भ्रामक बताते हुए कहा कि मौजूदा आदेश का प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।
