Eksandeshlive Desk
मेसरा (रांची): इंसान कितना निष्ठुर हो सकता है, इसकी एक कलेजा कंपा देने वाली तस्वीर बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र के गेतलातू स्थित जुमार नदी तट पर देखने को मिली। देवी दर्शन मंदिर के पीछे नदी की धार में बहता एक लावारिस नवजात बालक का शव बरामद किया गया। जिस मासूम को मां की ममता और पिता का साया मिलना चाहिए था, उसे अपनों ने ही बेदर्दी से नदी में बहा दिया। सूचना मिलते ही सअनि संतोष कुमार सिंह गश्ती टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मासूम के शव को पानी से बाहर निकाला। जब जन्म देने वालों ने मुंह मोड़ लिया, तब खाकी वर्दी ने अभिभावक का फर्ज निभाया।
थाना प्रभारी अजय कुमार दास के नेतृत्व में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, यूडी केस दर्ज किया और फिर पूरी पवित्रता व धार्मिक रीति-रिवाज के साथ मासूम का विधिवत अंतिम संस्कार संपन्न कराया। घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने कहा कि मानवता इस कदर निर्दयी हो चुकी है कि शब्द कम पड़ जाएं। यदि मानव जाति में जन्म लिया है तो दिल में इंसानियत होनी चाहिए। अगर किसी अस्पताल या घर में जन्म के बाद बच्चे की मौत हो भी गई थी, तो कम से कम उसका विधिवत अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था। इस तरह नदी में फेंक कर चले जाना अक्षम्य है। खाकी वर्दी ने तो आज अपना फर्ज निभाकर उस बेज़ुबान मासूम को सम्मानजनक अंतिम विदाई दे दी, लेकिन यह घटना हमारे बंजर होते सामाजिक मूल्यों का कड़वा सच उजागर करती है। यह मामला पूरे समाज से सवाल पूछता है! क्या हमारी संवेदनाएं इतनी मर चुकी हैं कि हम अपने ही खून को इस तरह नदी के हवाले कर दें?
