यूजीसी-नेट रद्द होने पर राहुल गांधी ने एनटीए की जवाबदेही पर उठाए सवाल, प्रश्नपत्र लीक की आशंका पर मांगा जवाब

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य विषयों की रद्द परीक्षाओं को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका पर भी एनटीए से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एनटीए की गलती का खामियाजा हजारों अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें वर्षों की तैयारी के बाद सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट में कहा कि समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य की यूजीसी-नेट परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित हुई थीं। करीब दो महीने बाद एनटीए ने इन तीनों परीक्षाओं को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों में गलतियां थीं और पुराने प्रश्न दोहराए गए थे।

छात्रों की समस्याओं तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और आगे भी इस मुद्दे को उठाते रहेंगे

राहुल गांधी ने कहा कि हजारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक परीक्षा की तैयारी की, आवेदन शुल्क जमा किया, दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की और परीक्षा में शामिल हुए। अब उन्हें सितंबर में फिर से वही प्रक्रिया दोहरानी होगी। राहुल गांधी ने कहा कि गलती एनटीए करता है, लेकिन सजा छात्रों को भुगतनी पड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था शिक्षा प्रणाली के बजाय ऐसी व्यवस्था बन गई है, जो छात्रों से उनका पैसा, वर्षों की मेहनत, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास लेती है, लेकिन बदले में रोजगार तक नहीं देती। राहुल गांधी ने एनटीए से सवाल किया कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उन्होंने कहा कि एनटीए इस सवाल का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की अन्य संस्थाओं की तरह एनटीए भी अपनी गलती स्वीकार नहीं करता और परीक्षा में गड़बड़ी होने पर जवाबदेही तय नहीं की जाती। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी छात्रों की समस्याओं तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और आगे भी इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। राहुल गांधी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही की दिशा में पहला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अंतिम कदम नहीं होना चाहिए और एनटीए के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने सितंबर में दोबारा यूजीसी-नेट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों से कहा कि वे समस्या नहीं हैं। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऐसी व्यवस्था तैयार हुई है, जो परीक्षा आयोजित करने में असमर्थ है और फिर छात्रों को ही इसका दोषी ठहराती है। उल्लेखनीय है कि एनटीए ने 16 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक नोटिस में कहा था कि यूजीसी-नेट जून सत्र के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियों की शिकायतें मिली थीं। जांच के लिए गठित समिति ने इन तीनों प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपोग्राफिकल और अनुवाद संबंधी त्रुटियों के अलावा पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति समेत अन्य खामियां पाईं। समिति की सिफारिश पर एनटीए ने इन तीनों विषयों की पुनर्परीक्षा कराने का फैसला किया है। एनटीए के अनुसार, अंग्रेजी और वाणिज्य की पुनर्परीक्षा 9 सितंबर तथा समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को होगी। पुनर्परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। शेष 84 विषयों के परिणाम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी किए जाएंगे। एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तीन विषयों की पुनर्परीक्षा के कारण जेआरएफ सीटों तथा सहायक प्रोफेसर और पीएचडी प्रवेश की पात्रता के लिए सीटों का आवंटन कम नहीं किया जाएगा।

राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने का किया आग्रह

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों की शेष चिंताओं को दूर करने के लिए उनसे बातचीत करना सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा। राहुल गांधी ने सोमवार को हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार संविधान में निहित है और यह लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में से एक है। पिछले कुछ महीनों में देश की शिक्षा व्यवस्था में पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को उस ज्ञान व्यवस्था के बजाय छात्रों के शोषण और उत्पीड़न का माध्यम बनाया जा रहा है, जो एक दशक पहले हुआ करती थी। राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड में छात्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा है और वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि उन्हें जानकारी है कि राज्य सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत की है और उनकी कई मांगों पर सहमति भी बनी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदर्शन अभी जारी है और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन से आग्रह किया कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें। इससे सरकार की छात्रों की बाकी चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। उन्होंने पत्र में कहा कि भारत के युवा ही देश का भविष्य हैं। उन्होंने मौजूदा संकट की स्थिति में छात्रों के साथ एकजुटता और समर्थन व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से उनकी बात सुनने तथा उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में उचित कदम उठाने का अनुरोध किया।

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