महर्षि पतञ्जलि ने योग और व्याकरण के माध्यम से मानव जीवन को अनुशासित, संतुलित और परिष्कृत बनाने का मार्ग प्रशस्त किया: कुलपति प्रो. राजीव मनोहर

360° Education Ek Sandesh Live

SUNIL KUMAR VERMA

राँची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय राँची के संस्कृत विभाग की ओर से सोमवार को नागपञ्चमी के अवसर पर पतञ्जलि जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में महर्षि पतञ्जलि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के साथ योग, व्याकरण और भारतीय ज्ञान-परम्परा में उनके योगदान पर विद्वानों ने विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर संस्कृत विभाग के विद्यार्थियों ने वैदिक मंगलाचरण, सरस्वती वन्दना, स्वागत गीत, नृत्य एवं गीत सहित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह को आकर्षक बनाया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने कहा कि महर्षि पतञ्जलि भारतीय ज्ञान-परम्परा के ऐसे महान् मनीषी हैं, जिन्होंने योग और व्याकरण के माध्यम से मानव जीवन को अनुशासित, संतुलित और परिष्कृत बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। योग जहाँ शरीर और मन के सामंजस्य का मार्ग दिखाता है, वहीं व्याकरण भाषा और विचार को शुद्धता एवं सुव्यवस्था प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा का गम्भीरतापूर्वक अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी प्राचीन ज्ञान-सम्पदा को आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ना आज के विद्यार्थियों और शिक्षकों का महत्त्वपूर्ण दायित्व है।
मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि महर्षि पतञ्जलि भारतीय मनीषा के उन विरल आचार्यों में हैं, जिनका योगदान भाषा, योग और मानव-जीवन के अनुशासन-तीनों क्षेत्रों में समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने महाभाष्य के माध्यम से संस्कृत व्याकरण-परम्परा को सुदृढ़ आधार प्रदान किया तथा योगसूत्र के माध्यम से चित्तवृत्तियों के निरोध और आत्मानुशासन का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि पतञ्जलि का अध्ययन केवल ग्रन्थों का अध्ययन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा की वैज्ञानिकता, तार्किकता और जीवन-दृष्टि को समझने का माध्यम है।
राँची विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने महर्षि पतञ्जलि के जीवन-वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परम्परा में पतञ्जलि को व्याकरण, योग और आयुर्वेद तीनों क्षेत्रों का महान आचार्य माना गया है। उन्होंने पतञ्जलि से सम्बन्धित प्रचलित आख्यानों एवं उनकी ज्ञान-साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि पतञ्जलि ने अपने कृतित्व से भारतीय ज्ञान-परम्परा को अत्यन्त समृद्ध किया। उनका व्यक्तित्व भारतीय मनीषा की समग्र जीवन-दृष्टि का परिचायक है।
डीएसपीएमयू के कुलसचिव एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा कि वस्तुतः वाणी में विशुद्धि, शरीर में स्वास्थ्य और चित्त में शान्ति यही पतञ्जलि-परम्परा की त्रिवेणी है। महर्षि पतञ्जलि की ज्ञान-साधना मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के परिष्कार का मार्ग प्रशस्त करती है। व्याकरण वाणी को परिष्कृत करता है, आयुर्वेद शरीर को स्वस्थ रखने की दिशा देता है और योग चित्त को संयमित एवं शान्त बनाता है। उन्होंने वर्तमान समय में पतञ्जलि के व्याकरण-चिन्तन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के युग में शब्दों की बाढ़ है, किन्तु शब्द-संयम का संकट भी है। असावधान शब्द सम्बन्ध तोड़ सकता है और सुसंस्कृत शब्द हृदय जोड़ सकता है।
मारवाड़ी महाविद्यालय, राँची के संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल कुमार ने कहा कि महर्षि पतञ्जलि भारतीय ज्ञान-परम्परा के ऐसे युगद्रष्टा आचार्य हैं, जिनका चिन्तन मनुष्य को बाह्य अनुशासन से आन्तरिक परिष्कार की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए पतञ्जलि का सबसे बड़ा संदेश अनुशासन, संयम और निरन्तर अभ्यास है। विद्यार्थियों को पतञ्जलि के विचारों को केवल पाठ्यक्रम और पुस्तकों तक सीमित न रखकर अपने अध्ययन, व्यवहार और जीवनचर्या में आत्मसात् करना चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रेरणा एवं प्रीति के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात् हैप्पी, प्रज्ञा एवं प्रिया ने सरस्वती वन्दना तथा प्राची, खुशी, कीर्ति एवं सुषमा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभाग की शिक्षिका मनीषा बोदरा एवं कीर्ति कुमारी ने एकल गीत तथा अनामिका भारती ने एकल नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं निधि, अनिशा, चन्द्रवती, खुशी, दीपिका व हैप्पी तथा गुलाची व आस्था ने समूह नृत्य प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय विभाग की शिक्षिका कुमारी जया ने कराया। समारोह का मंच संचालन डॉ. जगदम्बा प्रसाद ने किया, जबकि श्रीमित्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. आभा झा, सुरेन्द्र कुमार महतो, सचिन कुमार, प्रतिमा चौहान, लालेश्वर महतो, गौरव, निखिल, कृति, रीना, रामेश्वर, धीरज कुमार व धीरज सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक तथा संस्कृत विभाग के सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित थे।

Spread the love