चीनी राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय वार्ता के तौर-तरीकों की कांग्रेस ने निंदा की, देश की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता करने का लगाया आरोप, पूछे चार सवाल

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: कांग्रेस ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय वार्ता के तौर-तरीकों की निंदा करते हुए देश की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने सीमा सुरक्षा, गलवान के बाद दिए गए बयानों, लद्दाख-अरुणाचल में रणनीतिक नुकसान और 112 अरब डॉलर के रिकॉर्ड व्यापार घाटे को लेकर प्रधानमंत्री से चार सवाल पूछते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव (संचार) एवं सांसद जयराम रमेश ने रविवार को जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि चीन के साथ भारत के संबंधों का सामान्य होना अलग बात है लेकिन सरकार की ओर से जो देखने को मिला है वह सोच-समझकर किया गया आत्मसमर्पण है। उन्होंने सवाल किया कि क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई ‘क्लीन चिट’ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की स्थिति को कमजोर नहीं किया।

रमेश ने कहा कि लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त हासिल करने की अनुमति क्यों दी गई। पूर्वी लद्दाख के बड़े हिस्सों में भारत के पारंपरिक पेट्रोलिंग और मवेशी चराने के अधिकारों को छोड़ दिया गया है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण, पेट्रोलिंग प्वाइंट्स तक पहुंच खत्म होने और नए गतिरोध की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसके अलावा चीन शहरों के नाम बदल रहा है और ब्रह्मपुत्र नदी के ग्रेट बेंड पर 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम का निर्माण कर पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसने देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भारी नुकसान पहुंचाया है। देश में महत्वपूर्ण कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों और इंटरमीडिएट गुड्स के लिए चीन पर निर्भरता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ एक ही सिक्के के दो पहलू बन चुके हैं और इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है।

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