नेपाल के प्रधानमंत्री का यूएन में प्रस्ताव- नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में बने ‘हिमालय जलवायु तंत्र’

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एंथनी अल्बानीज ने कहा- बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण में नेपाली लोगों के साथ खड़ा रहेगा ऑस्ट्रेलिया

Eksandeshlive Desk

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में ‘हिमालय जलवायु उत्थानशीलता तंत्र’ (Himalayan Climate Resilience Mechanism) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। प्रधानमंत्री शाह ने शुक्रवार सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र करीब 2 अरब लोगों का आश्रयस्थल है और यह पृथ्वी की जीवन-रक्षक प्रणालियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने प्रस्तावित तंत्र के माध्यम से उपग्रह डेटा साझा करने, खतरनाक हिमतालों की संयुक्त निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि आपदा के समय सीमा-पार समन्वय को मजबूत किया जाना चाहिए। हिमालय क्षेत्र को खंडित सूचनाओं की सीमा के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रयोगशाला बनाया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने नेपाल में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए अपने देश की ओर से नेपाली जनता के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के ‘साइडलाइन’ में शुक्रवार को न्यूयॉर्क में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से मुलाकात के बाद अल्बानीज ने यह प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक के बाद अपने फेसबुक पेज पर अल्बानीज ने लिखा, “विनाशकारी बाढ़ और उससे हुए नुकसान से नेपाल उबर रहा है। पुनर्निर्माण और शोक की इस घड़ी में ऑस्ट्रेलिया नेपाली जनता के साथ खड़ा है।” उन्होंने कहा, “जहां जरूरत सबसे अधिक होगी, वहां सहायता पहुंचाने के लिए हम नेपाल के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।”

संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोले बालेन्द्र- भगवान पशुपतिनाथ विश्व का कल्याण करें, दुनिया बुद्ध के मार्ग पर चले: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा में अपने संबोधन का समापन विश्व शांति और कल्याण की कामना के साथ किया। उन्होंने नेपाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े भगवान पशुपतिनाथ और गौतम बुद्ध के संदेश को वैश्विक शांति से जोड़ा। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री शाह ने कहा, “भगवान पशुपतिनाथ विश्व का कल्याण करें। यह दुनिया बुद्ध द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चल सके।” प्रधानमंत्री शाह ने नेपाल की दो प्रमुख आध्यात्मिक पहचान—पशुपतिनाथ और गौतम बुद्ध—का उल्लेख किया। पशुपतिनाथ को नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख प्रतीक माना जाता है, जबकि गौतम बुद्ध का जन्मस्थान लुंबिनी नेपाल में है। शाह ने इन दोनों प्रतीकों के संदेश को केवल नेपाल तक सीमित न रखते हुए विश्व कल्याण और शांति की व्यापक भावना से जोड़ा। उनका यह संदेश ऐसे समय में आया जब उन्होंने अपने भाषण में जलवायु संकट, प्राकृतिक आपदाओं, वैश्विक असमानता और विकासशील देशों के सामने मौजूद चुनौतियों का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री शाह ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिमालय क्षेत्र में जलवायु सहयोग, आपदा के दौरान सीमा-पार समन्वय और वैश्विक स्तर पर न्यायपूर्ण व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अंत में उन्होंने राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों से आगे बढ़कर शांति, मानव कल्याण और सह-अस्तित्व की कामना के साथ नेपाल की आध्यात्मिक विरासत का संदेश दुनिया के सामने रखा।

वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर उठाए सवाल, बोले- हथियार तेजी से पहुंचते हैं, किसानों को खाद नहीं: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में असमानता पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया में हथियारों की आपूर्ति के लिए तेज और प्रभावी व्यवस्था मौजूद है, लेकिन किसानों तक खाद और ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था कमजोर है। संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को शुक्रवार सुबह संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल, राइफल और गोला-बारूद निर्धारित समय पर दुनिया के किसी भी हिस्से में पहुंच जाते हैं, लेकिन नेपाल के किसान जरूरत के समय बाजार मूल्य पर भी खाद और ईंधन नहीं खरीद पाते। उन्होंने कहा, “हमने युद्ध के लिए त्रुटिहीन लॉजिस्टिक्स प्रणाली और खाद्य पदार्थों के लिए बिखरी हुई लॉजिस्टिक्स प्रणाली वाली दुनिया बना दी है।” शाह ने कहा कि जिस देश के लोग किसी आवश्यक वस्तु की कीमत चुका सकते हैं, उन्हें वह वस्तु खरीदने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब दुनिया 72 घंटे के भीतर हथियारों को कहीं भी पहुंचा सकती है, तो किसानों को सम्मानजनक आजीविका के साधनों से वंचित रखने का कोई बहाना नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को जलवायु न्याय और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि कमजोर और विकासशील देशों के लोगों को उन संकटों का बोझ उठाना पड़ रहा है, जिन्हें उन्होंने पैदा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन नेपाल जैसे देशों को प्रभावित कर रहा है, जबकि वैश्विक आपूर्ति शृंखला की कमजोरियां गरीब आबादी पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं।

बालेन्द्र शाह की संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस से मुलाकात, आपदा और जलवायु मुद्दे पर की चर्चा: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि नेपाल आपदा को भू-राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बनाएगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि नेपाल में आपदा के कारण 1,400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा, “नेपाल इस आपदा को भू-राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बनाएगा। लेकिन नेपाल चाहता है कि जलवायु के संबंध में सभी अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।” शाह ने हिमालय क्षेत्र में भू-सूचना, उपग्रह संबंधी जानकारी और विशेषज्ञता को साझा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मुलाकात हुई। गुटेरेस ने भोटेकोशी आपदा में हुई जन-धन की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जलवायु से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र नेपाल के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने नेपाली प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवाओं की भी प्रशंसा की। प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, गुटेरेस ने वर्ष 1978 में पर्यटक के रूप में नेपाल आने की अपनी यात्रा को याद किया। उन्होंने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी नेपाल की मदद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

खनाल बोले- नेपाल को एशिया का आर्थिक, डिजिटल और रणनीतिक ‘ब्रिज’ बनाना होगा: नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि एशिया के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव के बीच नेपाल को अपनी भौगोलिक स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर में बदलना चाहिए। उन्होंने नेपाल को एशिया के आर्थिक, डिजिटल और रणनीतिक ‘ब्रिज’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित ‘स्टियरिंग नेपाल्स फ्यूचर इन एशियाज राइजिंग सेंचुरी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल को अपनी भौगोलिक स्थिति को राष्ट्रीय आकांक्षाओं की सीमा नहीं मानना चाहिए।विदेश मंत्री खनाल ने नेपाल को पारंपरिक रूप से ‘छोटा देश’ मानने वाली सोच बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “नेपाल छोटा नहीं है। नेपाल रणनीतिक रूप से सही स्थान पर है। हमारे पड़ोसियों का आकार भूगोल की वास्तविकता है, लेकिन यह हमारी महत्वाकांक्षा की सीमा कभी नहीं बनना चाहिए।” उन्होंने नेपाल के भूगोल और आबादी की अन्य देशों से तुलना करते हुए कहा कि नेपाल को केवल उसके आकार के आधार पर नहीं समझा जाना चाहिए। हाल में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुए खनाल ने इसे ‘हिमालयन सुनामी’ बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं, कठिन भूगोल और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करता रहा है। खनाल ने कहा कि हाल की आपदा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जलवायु परिवर्तन को नेपाल की विदेश नीति की रणनीतिक प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए।

नेपाल और नामीबिया के बीच राजनयिक संबंध स्थापित: नेपाल और नामीबिया के बीच औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित हो गए हैं। इसके साथ ही नेपाल के राजनयिक संबंधों का अब दुनिया के 187 देशों तक विस्तार हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में मौजूद नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और नामीबिया की अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं व्यापार मंत्री सेल्मा असिपाला मुसावी ने राजनयिक संबंध स्थापित करने संबंधी संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच पारस्परिक हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी जलवायुजनित आपदा से हुई मानवीय और भौतिक क्षति पर भी चर्चा की गई। दोनों मंत्रियों ने नेपाल और नामीबिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की नई संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों और उनके नागरिकों की साझी प्रगति और समृद्धि के लिए आपसी सहयोग को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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