नेपाल: मनांग में हिमस्खलन से चार लोगों की मौत, 12 अब भी लापता, बर्फ में दबे लोगों की तलाश

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू: नेपाल के मनांग जिले के नार्फाभूमि के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में हुए हिमस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश करना मुश्किल हो गया है। इस हादसे में अब तक चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 12 लोग अब भी लापता हैं। आशंका है कि वे बर्फ के नीचे दबे हुए हैं। नार्फाभूमि ग्रामीण के हिमलुंग क्षेत्र में रविवार को करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर हिमस्खलन हुआ था। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी। नेपाल राष्ट्रीय पर्वतीय गाइड संघ के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान रविवार को दो और सोमवार को दो शव बरामद किए गए। मृतकों की पहचान वीरेंद्र गुरुङ, घनश्याम राई, छेवी भोटे और पासांग भोटे के रूप में हुई है। बचावकर्मी अभी भी घटनास्थल के पास मौजूद हैं, लेकिन दोबारा खुदाई करने में असमर्थता जता रहे हैं। वहां एक और हिमस्खलन होने का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में आगे की कार्रवाई को लेकर उच्च स्तर पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। मनांग के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद पौडेल ने बताया कि हिमस्खलन के बाद से 12 लोग लापता हैं। उनके बर्फ में दबे होने की आशंका है। ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिमस्खलन होने के कारण खोज और बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। पौडेल ने बताया कि मंगलवार को घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान नहीं चला है, क्योंकि क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और हादसे की प्रकृति के कारण अभियान चलाना कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि सोमवार को बचावकर्मियों ने बर्फ में करीब आठ फीट तक खुदाई की, लेकिन इसके बावजूद कोई शव या व्यक्ति नहीं मिला। बचावकर्मियों का कहना है कि जब तक बर्फ नहीं पिघलती, तब तक लापता लोगों की तलाश करना संभव नहीं है। जानकारी के अनुसार काठमांडू की दो टूरिस्ट कंपनियों की ओर से बेस कैंप बनाने के लिए गए 27 नेपाली मजदूर हिमस्खलन की चपेट में आए थे। इनमें से 11 लोग हिमस्खलन के बाद सुरक्षित लौट आए। चार लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि शेष 12 लोगों की स्थिति अब भी अज्ञात है।

नेपाल में भारी बारिश और बाढ़-भूस्खलन से 27 लोगों की मौत, चार लापता: नेपाल में 24 से 27 सितंबर के बीच हुई भारी बारिश के कारण देशभर में 542 आपदा घटनाएं दर्ज की गईं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इन घटनाओं में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं। आठ लोग घायल हुए और 1,082 परिवार प्रभावित हुए हैं। इस दौरान 114 पशुओं की भी मौत हुई। प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, भूस्खलन की 304 घटनाओं में 20 लोगों की मौत हुई, चार लोग लापता हैं और सात घायल हुए। वहीं, बाढ़ से जुड़ी 87 घटनाओं में चार लोगों की जान गई। भारी बारिश से संबंधित 151 घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई और एक व्यक्ति घायल हुआ। लगातार बारिश और बाढ़ के कारण 227 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि 142 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बाढ़ और भूस्खलन की वजह से 31 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे कई क्षेत्रों में आवागमन और राहत-बचाव कार्य प्रभावित हुआ। प्राधिकरण के अनुसार, चार दिनों के दौरान देश के 186 वर्षा मापन केंद्रों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। पूर्वी नवलपरासी के देउढगाउं में सबसे अधिक 544.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके बाद कास्की के पंचासे में 500.2 मिलीमीटर और तनहुं के अत्रौलीटार में 472 मिलीमीटर बारिश हुई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से नेपाल के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश हुई। इसके चलते कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी और जनजीवन प्रभावित हुआ। आपदा के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने करीब 9.8 लाख लोगों को बाढ़ की चेतावनी संबंधी एसएमएस भेजे। जोखिम वाले क्षेत्रों से करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं, दूरदराज के जिलों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। म्याग्दी, जाजरकोट और बागलुंग समेत कई जिलों में हवाई राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी के साथ राहत और बचाव कार्य जारी रखा गया है।

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