Eksandeshlive Desk
सुराब: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सुराब जिले के नागर इलाके में कथित पाकिस्तानी सेना की बमबारी में एक मस्जिद और कई घरों को नुकसान पहुंचने की खबर है। घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों ने मुख्य हाईवे जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर बल प्रयोग किया। हालांकि, घटना में किसी के मारे जाने या घायल होने की तत्काल सूचना नहीं है। बलूचिस्तान की ऑनलाइन समाचार नेटवर्क ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया कि नागर में रात के समय बमबारी हुई, जिससे कई घरों और एक मस्जिद को नुकसान पहुंचा। इसके बाद लोगों ने मुख्य हाईवे पर प्रदर्शन कर घटना का विरोध किया।
बलिचा में वकीलों ने किया अदालतों का बहिष्कार: इसी बीच, मकरान डिवीजन के वकीलों ने केच जिले के बलिचा में 24 सितंबर को हुए एक कथित ड्रोन हमले के विरोध में गुरुवार को अदालती कामकाज का बहिष्कार किया। मकरान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर तुरबत, ग्वादर, पंजगुर और पासनी के वकील अदालतों में पेश नहीं हुए। इससे कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई और अदालत पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वकीलों के संगठनों ने बलिचा की घटना को ‘त्रासदी’ बताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। उनके अनुसार, चार स्थानीय युवक पिकनिक मनाने के लिए लोथम के पहाड़ी इलाके में गए थे, जहां कथित ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई। उन्होंने जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। परिवार के सूत्रों के अनुसार, बलिचा के छह निवासी लोथम गए थे। इनमें चार लोग खाना बना रहे थे, जबकि दो अन्य शिकार के लिए गए थे। इसी दौरान हुए हमले में चार लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। मृतकों में तीन चचेरे भाई भी शामिल थे। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने मृतकों को संदिग्ध उग्रवादी बताया और उनके पास से हथियार तथा गोला-बारूद बरामद होने का दावा किया। परिवारों और स्थानीय निवासियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मृतक आम नागरिक थे और पिकनिक के लिए इलाके में गए थे। यह घटनाक्रम बलूचिस्तान में हाल के महीनों में हवाई हमलों और बमबारी की सामने आई रिपोर्टों के बीच हुआ है। अगस्त में सुराब के गिदार गोंधन के निवासियों ने पाकिस्तानी सैन्य विमानों पर आम लोगों के घरों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस घटना में महिलाएं और बच्चे मारे गए तथा घायल हुए। इसके बाद परिवारों ने क्वेटा-कराची हाईवे पर धरना दिया था। पाकिस्तानी सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि विस्फोटक तैयार कर रहे चरमपंथियों की समय से पहले हुए विस्फोट में मौत हुई।
बलोच लड़ाकों ने बिजली ढांचे और पाकिस्तानी सेना के काफिलों पर किए हमले: बलोचिस्तान में दो बलोच हथियारबंद गुटों ने बिजली के बुनियादी ढांचे और पाकिस्तानी सेना के काफिलों पर हमले करने का दावा किया है। एक गुट ने कच्छी जिले में सेना के काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले में चार जवानों के मारे जाने का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। बलूचिस्तान की ऑनलाइन समाचार नेटवर्क ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ के मुताबिक, बलोच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने शुक्रवार को दावा किया कि उसके लड़ाकों ने सिबी के कटपार इलाके में बिजली ट्रांसमिशन लाइन के दो मुख्य टावरों को विस्फोटकों से उड़ा दिया। हमले में दो अन्य टावर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। संगठन के प्रवक्ता दोस्तैन बलोच के अनुसार, गुरुवार शाम कच्छी जिले के सन्नी के पास पाकिस्तानी सेना के एक काफिले पर हमले का भी दावा किया। प्रवक्ता ने कहा कि लड़ाकों ने भारी और स्वचालित हथियारों से एक वाहन को निशाना बनाया, जिसमें कई सैनिक मारे गए या घायल हुए। हालांकि, संगठन ने हताहतों की संख्या नहीं बताई। इसी बीच, यूनाइटेड बलोच आर्मी (यूबीए) ने भी कच्छी के सन्नी चिघार्डी इलाके में सेना के तीन वाहनों वाले काफिले पर हमला करने का दावा किया। संगठन के अनुसार, हमला गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे किया गया, जिसमें चार सैनिक मारे गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। यूबीए के प्रवक्ता मज़ार बलोच ने दावा किया कि सेना का काफिला इलाके में चलाए जा रहे एक सैन्य अभियान का हिस्सा था। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच करीब 90 मिनट तक मुठभेड़ हुई, जिसके बाद संगठन के लड़ाके वहां से हट गए। दोनों संगठनों ने बलोचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग की है और अपने सशस्त्र अभियान जारी रखने की बात कही है। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
