अफगान तालिबान को पाकिस्तान की चेतावनी-आतंकवादियों को समर्थन बंद नहीं किया तो भुगतने होंगे परिणाम
Eksandeshlive Desk
इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दक्षिण वजीरिस्तान के अंगूर अड्डा इलाके में अफगान तालिबान की सीमा चौकियों से पाकिस्तानी ठिकानों पर कथित तौर पर बिना उकसावे के गोलीबारी की गई। इसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए अफगान सीमा की कई चौकियों, मोर्टार ठिकानों और रक्षात्मक ढांचों को निशाना बनाया। दक्षिण वजीरिस्तान के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के बाद अफगान तालिबान के लड़ाके अपनी चौकियां छोड़कर भाग गए। पाकिस्तान की उर्दू टीवी चैनल दुनिया न्यूज और अंतरराष्ट्रीय मीडिया जिओ न्यूज के मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि अंगूर अड्डा क्षेत्र में अफगान सीमा चौकियों से पाकिस्तानी सुरक्षा ठिकानों पर लगातार गोलीबारी की गई थी। इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की। अधिकारी के मुताबिक, इस गोलीबारी में पाकिस्तानी सीमावर्ती इलाकों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार हैं। वहीं पाकिस्तान की सेना ने अफगान तालिबान शासन को चेतावनी दी है कि यदि उसने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन देना बंद नहीं किया, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
यह घटनाक्रम 27 अक्टूबर की रात अंगूर अड्डा इलाके में हुई गोलीबारी के कुछ दिनों बाद सामने आया है। पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, उस दौरान अफगान तालिबान की ओर से नागरिक घरों और अंगूर अड्डा बाजार को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी। इस दौरान एक रिहायशी इलाके में मोर्टार का गोला गिरने से एक नागरिक की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। गोलाबारी में बाजार की कई दुकानों को भी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अफगान सीमा पर स्थित कई तालिबानी चौकियों को निशाना बनाया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान में अफगान तालिबान की सात चौकियां नष्ट कर दी गई थीं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वह प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करने से नहीं रोक रहा है। इस्लामाबाद ने कई बार काबुल से मांग की है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए न होने दे। दक्षिण वजीरिस्तान में ताजा गोलीबारी की घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। वहीं पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही।लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका है और अफगान तालिबान शासन उसके प्रॉक्सी के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का प्रतिनिधि बताते हुए अफगान तालिबान पर उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अफगान तालिबान अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए गैर-राज्य तत्वों और भाड़े के लड़ाकों का इस्तेमाल कर रहा है। उनके मुताबिक, अफगानिस्तान में लंबे समय से विभिन्न खुफिया एजेंसियों और प्रॉक्सी समूहों का प्रभाव रहा है।
आईएसपीआर महानिदेशक ने अफगानिस्तान में जैश अल-अदल, अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने आरोप लगाया कि अफगान तालिबान शासन ने टीटीपी प्रमुख नूर वली महसूद, बशीर ज़ेब और गुल बहादुर को पनाह दे रखी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों तक हथियार और अन्य जरूरी सामान पहुंचाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मांग स्पष्ट है कि अफगान तालिबान अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे और पाकिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को किसी भी तरह का समर्थन देना बंद करे। आईएसपीआर महानिदेशक ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान तालिबान पर दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अफगान शासन को जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करना चाहिए, नशीले पदार्थों की खेती और उत्पादन पर रोक लगानी चाहिए तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के सशस्त्र बल अफगानिस्तान की ओर से आने वाले सभी संभावित खतरों, जिसमें ड्रोन हमले भी शामिल हैं, का मुकाबला करने में सक्षम हैं। आईएसपीआर महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और अफगान तालिबान ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
