News & Edit by Sunil Verma
सरला बिरला विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह में बोले
मिला सम्मान : 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण और 10 को मिली पीएचडी की डिग्री
रांची: विद्यार्थियों से असफलताओं से घबराए बिना अनुशासन और आत्मविश्वास से जीवन में आगे बढ़ने की जरूरत है। अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राज्य और राष्ट्र की बेहतरी के लिए करने का उन्होंने छात्रों से आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के इस युग में छात्रों को अपने कौशल से साथ ही चरित्र निर्माण का भी प्रदर्शन करना होग। उक्त बातें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सरला बिरला विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह कही। उन्होंने विश्वविद्यालय के 32 विद्यार्थियों को बसंत कुमार सरला बिरला स्वर्ण पदक और 10 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की। इसके साथ ही विभिन्न संकायों के 1331 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के समग्र विकास को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए सरला बिरला विश्वविद्यालय की उन्होंने सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि विवि में अर्जित ज्ञान, कौशल और मूल्यों की बदौलत विद्यार्थी नौकरी सृजन करने वाले बन सकेंगे। गोविन्दभाई ढोलकिया ने सफलता को हासिल करने के लिए छात्रों से कंफर्ट जोन से बाहर निकलने की अपील की। उन्होंने डिग्री को मंजिल की बजाए समाज के प्रति जिम्मेदारी करार दिया। डॉ. बी. के. दास ने युवाओं से अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग कर राष्ट्र की प्रगति में अहम भूमिका निभाने की बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत की तकनीक का ही कमाल है कि हम वैश्विक शक्ति बन चुके हैं। डॉ. डी. गौरीशंकर ने इसरो की सफलता का जिक्र करते हुए छात्रों को अपने लक्ष्य की राह में अनवरत आगे बढ़ने का मंत्र दिया। अपने संबोधन में पूर्णिमा महतो ने युवाओं को अपने लक्ष्य पर फोकस करने को कहा। सामाजिक स्तर पर दूसरों का सम्मान करते हुए सामूहिक प्रयासों की बात उन्होंने की।शासी निकाय के सदस्य अनंत जाटिया ने बिरला परिवार की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए उनके बताए हुए मूल्यों एवं दृष्टिकोण को अपनाने की बात की। जीवन में ईमानदारी के साथ विनम्रता को अपनाने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने ‘विद्या ददाति विनयम’ के मूल मंत्र को जीवन में अपनाने की बात की। चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियां नौकरी दे सकती हैं, लेकिन सफलता को सिर्फ चरित्र ही स्थायित्व प्रदान कर पाने में सक्षम है। दीक्षांत समारोह में इसरो के चेयरमैन डॉ वी. नारायणन, डीआरडीओ के महानिदेशक डॉ. बी. के. दास, राज्यसभा सांसद गोविंदभाई ढोलकिया एवं तीरंदाजी कोच पद्मश्री पूर्णिमा महतो को पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान की गई। डॉ. वी. नारायणन अन्यान्य व्यस्तताओं की वजह से कार्यक्रम में शिरकत कर पाने में असमर्थ रहे। उनके स्थान पर उनके विशेष प्रतिनिधि इसरो के निदेशक (ओआईसीसी) डॉ. डी. गौरीशंकर ने उपाधि ग्रहण की।समारोह में विवि के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक एवं राज्यसभा सांसद सह शासी निकाय के सदस्य डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा भी उपस्थित रहे।विवि के कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने विवि का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विवि की स्थापना के उद्देश्यों से लेकर संचालित अकादमिक गतिविधियों और विस्तार योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विवि कैंपस को गोल्ड ग्रीन प्रमाणपत्र मिलने को पर्यावरण गुणवत्ता की दिशा में महत्वपूर्ण करार दिया। नवाचार से लेकर अनुसंधानों और खेलों में विवि की उपलब्धियों पर उन्होंने चर्चा की। स्व. बी. के. बिरला और स्व. सरला देवी बिरला के विजन की बात करते हुए एसबीयू के विभिन्न संकायों के बारे में उन्होंने चर्चा की। विवि के रिसर्च और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक करार की भी उन्होंने जानकारी दी।
