बाल विवाह मुक्त भारत के 100 दिवसीय अभियान के पूर्ण होने पर हरिल गांव में विश्व महिला दिवस का आयोजन

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Eksandeshlive Desk

रांची: भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत रांची जिले के गांवों एवं प्रखंड में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त राँची और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करते के बेहद करीब हैं। सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय बाल अधिकारों की सुरक्षा ‌व संरक्षण के‌ लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।

वहीं जागरूकता रथ ने जिले के तमाम गांवों और प्रखंड में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। प्रमुख सड़कों और बेहतर पहुंच वाले मार्गों से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ गुजरे, जबकि संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक पहुंचा गया ताकि बाल विवाह मुक्त राँची का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके।

सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय के निदेशक राजेन कुमार बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा, “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।”

उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जनभागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून, सुरक्षा और जवाबदेही के संकल्प को हम जनसमुदाय तक ले गए ताकि बाल विवाह मुक्त राँची का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके। साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत के 100 दिवसीय अभियान के पूर्ण होने पर मांडर प्रखंड के हरिल गांव में विश्व महिला दिवस का आयोजन किया गया जिसमें गांव के मुखिया, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य, SSG के महिला सदस्य और संस्था के साथी ने मिलकर महिला दिवस के अवसर पर महिलो को कानूनी जानकारी और जागरूक किया। अंत में शपथ ग्रहण कर कार्यक्रम को समाप्त किया गया।

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