बिहार में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम

360° BIHAR Ek Sandesh Live


बिहार: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पटना पहुंचे, जहां उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और राज्य में रेलवे से संबंधित परियोजनाओं पर चर्चा की। पूरे दिन रेल मंत्री ने पटना और जमालपुर के बीच विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान राजीव रंजन सिंह, सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा उनके साथ थे। जमालपुर पहुंचने पर रेल मंत्री ने जमालपुर स्टेशन का निरीक्षण किया और 30 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे पुनर्विकास कार्य की समीक्षा की तथा गुणवत्ता और समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। जमालपुर वर्कशॉप में उन्होंने अन्य मंत्रियों और गणमान्य लोगों के साथ वैगन मैन्यूफैक्चरिंग शॉप और क्रेन शॉप का दौरा किया। उन्होंने वैगनों की पीओएच क्षमता बढ़ाने के लिए 78.96 करोड़ रुपये की लागत वाली एक नई परियोजना की भी घोषणा की। वैगन मैन्यूफैक्चरिंग वर्कशॉप में मंत्री ने स्थानीय स्तर पर निर्मित बॉक्सन वैगन, बीएलसी वैगन और शौचालय की सुविधा वाले ब्रेक वैन का निरीक्षण किया। क्रेन वर्कशॉप में उन्होंने नवनिर्मित 140 टन के क्रेन, 8 व्हीलर टावर कार और प्रसिद्ध जमालपुर जैक का निरीक्षण किया। यह सभी वर्कशॉप के सिग्नेचर उत्पाद हैं। वर्कशॉप के कर्मचारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने जमालपुर में भारतीय रेलवे यांत्रिक एवं विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान का दौरा किया, जहां उन्होंने “उत्कृष्टता केंद्र” नामक पुस्तिका का विमोचन किया, जिसमें वेल्डिंग, न्यूमेटिक्स, हाइड्रोलिक्स और मेक्ट्रोनिक्स जैसी शाखाओं के लिए विस्तृत विकास योजनाओं की रूपरेखा दी गई है। इस पुस्तिका में आईआरआईएमईई में बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण सुविधाओं के उन्नयन के लिए रणनीतिक योजनाएं शामिल हैं। जमालपुर स्टेशन, आईआरआईएमईई और कार्यशाला के विकास और उन्नयन के लिए कुल 350 करोड़ का निवेश किया जाएगा। वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, वैगनों, क्रेन और जमालपुर जैक के उत्पादन लक्ष्यों में लगातार वृद्धि हो रही है। वैगन पीओएच क्षमता को 545 से बढ़ाकर 800 वैगन प्रति माह करने की परियोजना की आधारशिला रखने के साथ, ओवरहालिंग क्षमता प्रति माह 255 यूनिट से अधिक बढ़ जाएगी। लगभग 79 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से टर्नअराउंड समय कम होगा, वैगन की उपलब्धता बढ़ेगी और परिचालन दक्षता में सुधार होगा। 2026 से, कफकटएए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में जनता के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू करेगा। यह संस्थान भारत में एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र और तकनीकी शिक्षा में एक मील का पत्थर बनने के लिए तैयार है। 2009 से 2014 के बीच, बिहार को रेलवे विकास के लिए सालाना औसतन ₹1,132 करोड़ मिले। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में, यह इस साल बढ़कर 10,066 करोड़ हो गया है – 9 गुना अधिक। 2009-14 से, बिहार में सालाना औसतन 64 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बनाई गईं, जबकि 2014-24 से, औसत बढ़कर 167 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गई – 2.5 गुना अधिक। विद्युतीकरण में भी 30 किमी/वर्ष से 275 किमी/वर्ष तक उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई – नौ गुना वृद्धि। वर्ष 2014 से अब तक बिहार में 1,832 किलोमीटर नई लाइनें और 3,020 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जिससे यह 100% विद्युतीकृत हो गया है – जो मलेशिया के कुल रेलवे नेटवर्क के बराबर है। इन विकासों से बिहार के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में काफी सुधार होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने विकास के लिए रेल मंत्री के समावेशी और विस्तृत दृष्टिकोण की प्रशंसा की। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने बिहार की प्रगति में रेलवे के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। विधायक प्रणव कुमार, अजय कुमार सिंह, राजीव कुमार सिन्हा और लाल मोहन गुप्ता के साथ-साथ महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह और मिलिंद देउस्कर भी मौजूद थे।

Spread the love