NEWS BY MUSTAFFA
मेसरा(रांची): रोजगार की तलाश में सात समंदर पार दुबई गए झारखंड के 14 प्रवासी मजदूरों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। लंबे समय से आर्थिक तंगी और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे इन मजदूरों की सुध लेते हुए स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई पहल रंग लाई है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ ही दिनों में ये सभी मजदूर सुरक्षित अपने वतन और अपने परिवार के पास लौट आएंगे।
“सोशल मीडिया और आपसी समन्वय ने दिखाई राह”
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब इन मजदूरों की बदहाली की खबर समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर वायरल हुई। दुबई के मशरिक बैंक में कार्यरत ओरमांझी प्रखंड के ईरबा गांव निवासी ज़ैद अहमद अंसारी ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने रांची में मौजूद झारखंड NSUI के प्रदेश महासचिव मुसर्रफ हुसैन से संपर्क साधा। मुसर्रफ हुसैन ने तत्परता दिखाते हुए सभी मजदूरों के विवरण और जरूरी दस्तावेज जुटाकर दुबई भेजे,जिसके बाद सहायता की कार्रवाई शुरू हुई।
“कंपनी की मनमानी और दूतावास की सख्ती”
जाँच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। संबंधित कंपनी न केवल मजदूरों के वेतन में अनुचित कटौती कर रही थी,बल्कि लंबे समय से उनकी पगार भी रोकी गई थी। सबसे गंभीर बात यह थी कि कंपनी ने अवैध रूप से मजदूरों के पासपोर्ट और एमिरेट्स आईडी अपने कब्जे में ले रखे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए ज़ैद अहमद अंसारी ने कंपनी के एचआर (HR) को मौके पर बुलाया और सख्त लहजे में बात की। साथ ही,भारतीय दूतावास को इस पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। दूतावास ने कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि वे तत्काल मजदूरों के पासपोर्ट जमा करें और बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें।
“इन मजदूरों के घर लौटेगी खुशियाँ”:
मदद पाने वाले मजदूरों में मुख्य रूप से अजय कुमार,दलेश्वर महतो,रोहित महतो,सीमा महतो,दिलीप महतो,गंगाधर महतो,तिलकी महतो,बैजनाथ महतो,जलेश्वर महतो,फलेन्द्रा महतो,राजेश महतो,दीपक कुमार,रोशन कुमार और अजय कुमार (बदरी महतो) शामिल हैं। “हमने कंपनी प्रबंधन से दो टूक बात की है और भारतीय दूतावास भी पूरी तरह सक्रिय है। मजदूरों के अधिकार उन्हें वापस दिला दिए गए हैं और अब हमारा लक्ष्य उन्हें सुरक्षित झारखंड पहुँचाना है।” – ज़ैद अहमद अंसारी,समाजसेवी (दुबई)।
