झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में एक और टेंडर घोटाले की तैयारी : प्रतुल

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Eksandeshlive Desk

रांची : झारखंड में टेंडर घोटाला को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर आक्रामक हो गई है। पिछले दिनों प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य विभाग में हुए टेंडर में अनियमितता का आरोप लगाया था और शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भवन निर्माण विभाग में टेंडर को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार में एक और टेंडर घोटाले की पृष्ठभूमि लिखी जा रही है। भवन निर्माण विभाग के प्रमंडल संख्या एक में जो भी टेंडर अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं या वेबसाइट पर निकाले जा रहे हैं, उसमें किए जाने वाले कार्यों की राशि का जिक्र ही नहीं हो रहा है। इसका मतलब है कि इच्छुक लोगों को यह अंदाज ही नहीं लग पा रहा है कि यह टेंडर कितने का है? उन्होंने कहा कि जब आप पैसा देकर टेंडर पेपर और बीओक्यू को खरीदते हैं, तब जाकर आपको अनुमानित राशि का पता चलता है।

ऑनलाइन टेंडर में भी सेटिंग का नया तरीका ढूंढ लिया गया : प्रतुल ने कहा कि नियमों के अनुसार कार्य का नाम और खर्च होने वाली अनुमानित राशि का जिक्र टेंडर में होता है, लेकिन प्रमंडल-एक में निकल रहे टेंडर के नोटिस में इसका जिक्र नहीं हो रहा। उन्होंने कहा इससे इच्छुक ठेकेदारों को यह पता नहीं चल पाता की टेंडर कितनी राशि का है। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि ये सारा खेल एक और बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा कि विभाग उन्हीं ठेकेदारों को यह राशि अनौपचारिक रूप से बताता है, जिसे विभाग काम आवंटित करना चाहता है। बीओक्यू में भी किसी को पूरी राशि का विवरण दिया जाता है, तो किसी को आधी-अधूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह तो संभव नहीं है कि कोई ठेकेदार हर एक टेंडर का पेपर खरीदे, जिससे कि उसे सही राशि के बारे में पता चल सके। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पहले ऑफलाइन टेंडर में बड़ा घोटाला होता था, जिसके कारण टेंडर को ऑनलाइन किया गया, लेकिन हेमंत सरकार में ऑनलाइन टेंडर में भी सेटिंग का नया तरीका ढूंढ लिया गया है। उन्होंने कहा कि नियम के विरुद्ध कार्य किया जा रहा है। संभवतः देश के किसी दूसरे राज्य में ऐसी व्यवस्था नहीं है, जहां टेंडर के नोटिस या अखबार में छपे विज्ञापन या वेब में निकाले गए टेंडर के नोटिस में खर्च होने वाली राशि का जिक्र ना हो। यह सिर्फ झारखंड में हेमंत सरकार के कार्यकाल में ही संभव है।

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