झारखंड विधानसभा-बजट सत्र : जो काम 50 सालों में नहीं हुआ, उसे पांच सालों में करेंगे पूरा : हफीजुल

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Eksandeshlive Desk

रांची : सदन में जल संसाधन विभाग की अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दूसरी पाली में मंत्री हफीजुल हसन ने गुरुवार को सरकार के जवाब में विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में जो काम पिछले 50 वर्षों में नहीं हुआ, उसे वे पांच साल में पूरा करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए फील्ड में मेहनत करनी होगी। शक्ति का प्रदर्शन कार्यों से होना चाहिए, शब्दों से नहीं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि बाल पहाड़ी गांडे मेगा सिंचाई योजना से गिरिडीह, धनबाद और जामताड़ा जिले के लगभग 37 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा खूंटी जिले के अड़की और मुरहू प्रखंड के लिए चारा उल्हा पाइपलाइन सिंचाई योजना पर भी काम किया जाएगा। सिमडेगा में हैपाला मेगा योजना और पूर्वी सिंहभूम में पटमदा बोड़ाम मेगा सिंचाई योजना को भी आगे बढ़ाने की योजना है। सिकिया और मसलिया योजनाओं के पहले चरण का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वित्त पोषण के मुद्दे पर मंत्री ने केंद्र सरकार पर भी सवाल खडा किया। मंत्री ने कहा कि पहले बड़ी सिंचाई योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी अधिक होती थी, लेकिन अब राज्य सरकार को ज्यादा आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की समृद्धि और राज्य का विकास है। मंत्री ने कहा कि जल बचेगा तो कल सजेगा और हर खेत में हरियाली लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसलिए जल संसाधन विकास विभाग इसपर ठोस कार्य कर रहा है। इसके साथ ही स्पीकर रबींंद्र नाथ महतो ने बजट पर विपक्ष की ओर से लाई गई कटौती प्रस्ताव को अस्वीकृत करते हुए मांगे स्वीकृत कर दी। साथ ही सदन की कार्यवाही 13 मार्च की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्य सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12 वें दिन गुरुवार को जल संसाधन और विधि व्यवस्था विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए गढ़वा के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्य सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य की करीब 70 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन जल संसाधन विभाग को बजट केवल 1 से 1.5 प्रतिशत ही आवंटित किया जाता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा रफ्तार से झारखंड की पूरी कृषि योग्य भूमि तक पानी पहुंचाने में लगभग 129 साल लग जाएंगे। गढ़वा के विधायक ने सदन में कहा कि विभाग के पास बजट खर्च करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में जल संसाधन विभाग के लिए आवंटित 2257 करोड़ रुपये में से केवल 72 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी। उन्होंने कहा कि राज्य के कई विभागों में औसतन 45 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कई अधूरी सिंचाई परियोजनाओं का भी मुद्दा उठाया। स्वर्णरेखा परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 48 साल पहले शुरू हुई इस योजना की लागत कई गुना बढ़ चुकी है, फिर भी यह पूरी नहीं हो सकी है। इसी तरह कोणार परियोजना की लागत भी कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने मेराल प्रखंड के पलाही डैम का भी जिक्र करते हुए कहा कि इस बांध का करीब 90 प्रतिशत काम वर्षों पहले पूरा हो चुका था, लेकिन इसके बाद भी इसे पूरा नहीं किया गया। विस्थापन के मुद्दे पर तिवारी ने कहा कि मंडल डैम बनने के बाद करीब 7000 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार के पास अब तक कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त तैयारी के लोगों को दूसरी जगह बसाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। चर्चा के दौरान उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और न्यायपालिका में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। अपने ऊपर लगे अलकतरा घोटाले के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने उनपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने मांग की कि राजनीतिक लोगों से जुड़े मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। विधायक ने सरकार के बजट को दिखावे का बजट बताते हुए कहा कि यह केवल कागजों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों, सिंचाई योजनाओं और विस्थापितों के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

सदन में विधायक रोशन लाल चौधरी ने जल संसाधन विभाग और विस्थापन नीति पर उठाए सवाल

सदन में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने जल संसाधन विभाग, लघु सिंचाई विभाग और विधि विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जल है तो कल है केवल एक नारा नहीं बल्कि धरती की धड़कन है और जल संसाधनों के संरक्षण और उपयोग को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। रोशन लाल चौधरी ने विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के सिंचाई क्षमता के आंकड़े बिल्कुल समान हैं। इससे ऐसा लगता है कि विभाग ने आंकड़ों को केवल कॉपी-पेस्ट किया है और जमीन पर एक हेक्टेयर भूमि पर भी नई सिंचाई क्षमता नहीं बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की 29.74 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से केवल 42.26 प्रतिशत संभावित क्षमता पर ही सिंचाई उपलब्ध है, जबकि लगभग 60 प्रतिशत भूमि आज भी सिंचाई से वंचित है। उन्होंने सदन को बताया कि राज्य में 13 बड़ी और 21 मध्यम सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं। स्वर्ण रेखा परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1978 में 128.89 करोड़ रुपये से शुरू हुई यह योजना अब बढ़कर 14,949.74 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो मूल लागत से कई गुना अधिक है। इसके बावजूद परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम अब भी अधूरा है। रामगढ़ जिले की भैरवी जलाशय योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नहर निर्माण नहीं होने के कारण गोला और चितरपुर क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। विस्थापन के मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि राज्य में विस्थापन आयोग का गठन केवल कागजों तक सीमित रह गया है। उन्होंने कहा कि पतरातू, कोनार, ईचा और मैथन डैम के निर्माण में 500 से अधिक गांव उजड़ गए और 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, लेकिन उन्हें आज तक उचित मुआवजा और रोजगार नहीं मिला। उन्होंने मांग की कि सरकार राज्य स्तरीय विस्थापन कार्ड जारी करे और विस्थापितों को समय पर नौकरी और मुआवजे की गारंटी दे। विधि विभाग पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय और लोअर कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। इसके कारण आम लोगों को न्याय के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की अपील की।

मेगा सिंचाई योजनाओं पर सरकार कर रही काम : जिग्गा

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक जिग्गा सुसारण होरो ने गुरूवार को सदन में जल संसाधन, सिंचाई व्यवस्था के बजट पर कटौती प्रस्ताव के विपक्ष में कहा कि राज्य में किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ऊंचाई पर स्थित कृषि योग्य भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भूमिगत पाइपलाइन और मेगा सिंचाई योजनाओं पर सरकार की ओर से काम किया जा रहा है। लघु सिंचाई योजनाओं के तहत 269 चेक डैम का निर्माण कराया गया है, जिससे लगभग 18,300 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का सृजन हुआ है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जल संसाधन विभाग के लिए 2715 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है, जिससे सिंचाई योजनाओं को और गति मिलेगी। जिग्गा ने पारस जलाशय योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विपक्ष सत्ता में था, तब इस योजना की अनदेखी की गई और डैम में लगातार लीकेज की समस्या बनी रहती थी। वर्ष 2019 के बाद सरकार ने इस योजना पर ध्यान दिया, जिसके बाद अब वहां के किसान खेती कर पा रहे हैं। विधायक ने सदन में केंद्र और राज्य के बीच तालमेल की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है और राज्य का जायज पैसा रोक कर रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सूचनाओं के माध्यम से योजनाओं में बाधा डालता है, जबकि सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है।

सिंचाई से मत्स्य पालन कर युवा बन रहे आत्मनिर्भर : सुरेश

विधानसभा बजट सत्र के दौरान दूसरी पाली में गुरूवार को विधायक सुरेश पासवान ने विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का विरोध करते हुए राज्य सरकार की सिंचाई योजनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों को पानी भी मिल रहा है और जलाशय योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य केवल नकारात्मक बातें करने के लिए सदन में आते हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कुछ लोग स्वर्णरेखा डैम की परियोजना की आलोचना करते हैं। उन्होंने पुनासी जलाशय योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस परियोजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इसके साथ ही जलाशय में मत्स्य पालन के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। विधायक ने कहा कि चांडिल, मसानजोर, मैथन और स्वर्णरेखा जैसे महत्वपूर्ण बांधों से किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है और इन परियोजनाओं का लाभ राज्य के कई जिलों तक पहुंच रहा है। सुरेश पासवान ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि पुनासी जलाशय योजना की तर्ज पर त्रिकुट जलाशय योजना सहित अन्य जलाशय योजनाओं को भी जल्द पूरा करने की मांग की। विधायक ने सभी विधायकों के क्षेत्रों में चापाकल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा विस्थापित परिवारों की समस्याओं का जल्द समाधान करने तथा गर्मी के मौसम को देखते हुए देवघर शहर में संभावित जल संकट को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही।

तिलैया डैम से किसानों को नहीं मिल पा रही सिंचाई सुविधा : मनोज

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक मनोज यादव ने सिंचाई विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए गुरुवार को राज्य की सिंचाई व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड एक पठारी और वन क्षेत्र वाला राज्य है, जहां कृषि काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर रहती है, बावजूद इसके राज्यभर के किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसलिए पलायन की समस्या पैदा हुई है। विधायक ने कहा कि तिलैया डैम जैसे बड़े जल संसाधन होने के बावजूद किसानों को बरही क्षेत्र में पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके कारण खेती प्रभावित हो रही है। कई किसानों को रोजगार की तलाश में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने सदन में बरकठा क्षेत्र की पाइपलाइन योजना के लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही लोटिया जलाशय के गेट टूटे होने की समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। विधायक ने यह भी कहा कि बक्सा डैम की नहर निर्माण योजना वन विभाग से संबंधित बाधाओं के कारण अटकी हुई है, जिसे जल्द दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय मंत्री को सुझाव देते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों में लिफ्ट सिंचाई की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए और छोटे-बड़े तालाबों की नियमित सफाई कराई जाए। इससे किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिल सकेगा और खेती की स्थिति में सुधार आएगा। विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि सिंचाई योजनाओं को जल्द जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाए, ताकि राज्य के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

विधायक ने सदन में उठाया 251 बर्खास्त अनुसेवकों का मामला

झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान गुरुवार को विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने जिले के 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। सदन में अपनी बात रखते हुए विधायक ने कहा कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति विधिवत विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के माध्यम से की गई थी और ये सभी कर्मचारी कई वर्षों से अपनी सेवा दे रहे थे। इसके बावजूद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई, जिससे वे और उनके परिवार गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बाद अचानक नौकरी समाप्त कर देना इन कर्मचारियों के साथ अन्याय है। सरकार को इस मामले पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए और कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए। विधायक ने सरकार से मांग किया कि 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को पुनः सेवा में बहाल किया जाए, ताकि उनके साथ न्याय हो सके और उनके परिवारों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों की नौकरी उनके परिवारों के जीवनयापन का एकमात्र साधन है, ऐसे में उनकी सेवा समाप्ति से पूरे परिवार का भविष्य संकट में पड़ गया है। विधायक ने सरकार से अपेक्षा जताई कि इस मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इधर, नौकरी से हटाए गए 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों ने विधायक आलोक चौरसिया के प्रति आभार व्यक्त किया है। आभार प्रकट करने वालों में सुधाकर दुबे, संजीव पाण्डेय, हृदया नारायण पासवान, विवेका शुक्ला, अरुण कुमार, अरुण कुमार शुक्ला सहित अन्य के नाम शामिल हैं।

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