Eksandeshlive Desk
वाशिंगटन : पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण कर सकता है। इसमें खर्ग द्वीप पर स्थित ईरान का मुख्य निर्यात केंद्र भी शामिल है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है। खर्ग द्वीप को ईरान की जीवन रेखा कहा जाता है। अमेरिका के फाइनेंशियल टाइम्स ने सोमवार को रिपोर्ट दी कि ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ युद्ध में उनका पसंदीदा विकल्प “तेल पर कब्जा करना” होगा। उन्होंने इसकी तुलना वेनेज़ुएला में अमेरिका की योजनाओं से की। उनका दावा है कि निकोलस मादुरो को हटाने के बाद वाशिंगटन का लक्ष्य लंबे समय तक तेल क्षेत्र को नियंत्रित करना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि खर्ग द्वीप से ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है। वहां ईरान की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है। इसलिए सैन्य अभियान आसानी से शुरू हो सकता है। उन्होंने माना कि इसके लिए संभवतः लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी की आवश्यकता होगी।
खर्ग द्वीप पर टिकी है ईरान की अर्थव्यवस्था : उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति पहले ही बढ़ा दी है, और लगभग 10,000 सैनिक तैनात किए हैं। इनमें मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिक शामिल हैं। खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप है। इसे ईरान की अर्थव्यवस्था की “जीवन रेखा” माना जाता है। ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशथ से 94 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से गुजरता है। यह बुशहर प्रांत से लगभग 25-28 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है। इसकी लंबाई लगभग आठ किलोमीटर और चौड़ाई 4-5 किलोमीटर है। फारस की खाड़ी के अधिकांश द्वीपों के विपरीत खर्ग द्वीप पर मीठे पानी का अपना प्राकृतिक स्रोत है। इस द्वीप पर लगभग 3 करोड़ (30 मिलियन) बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। द्वीप के चारों ओर पानी काफी गहरा है। इससे दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर यहां आसानी से लंगर डाल सकते हैं। ईरान के लिए यह द्वीप केवल एक तेल टर्मिनल नहीं, बल्कि एक सैन्य किला भी है। यहां बड़े पैमाने पर तेल लोडिंग सुविधाएं और सैन्य बुनियादी ढांचा मौजूद है। हाल के वर्षों में विशेषकर मार्च 2026 में,अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह द्वीप वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। अमेरिकी हमलों के डर से ईरान ने यहां अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और द्वीप के चारों ओर पानी में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
