सड़क नहीं तो लोकसभा व विधानसभा चुनाव में वोट नहीं, वोट के बहिष्कार के लिए गोलबंद हुए घाघरा के ग्रामीण

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Eksandeshlive Desk
घाघरा : घाघरा थाना क्षेत्र के जिलिंगसिरा गांव के सैकड़ो ग्रामीणों ने गांव में बैठक कर आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में नारा लगाया है कि रोड नहीं तो वोट नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि 70 साल से हम सभी बदहाली में जीवन जी रहे हैं। गांव में लगभग 150 घर है जिसमें लगभग एक हजार लोगों की आबादी है। मुख्य मार्ग से 2 किलोमीटर के अंदर जिलिंगसिरा गांव बसा है जहां से गांव आने के लिए सड़क बिल्कुल ही खराब है। इसके लिए स्थानीय विधायक चमरा लिंडा को तीन बार आवेदन दिया जा चुका है। साथ ही सांसद सुदर्शन भगत को भी दो बार आवेदन दिया गया। इसके अलावे जिला व प्रखंड प्रशासन को कई बार आवेदन दिया गया है। इसके बावजूद भी किसी भी तरह का पहला सड़क बनाने की दिशा में नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण हम सभी ने निर्णय लिया है कि आने वाले चुनाव में वोट बहिष्कार करेंगे। वोट देने का कोई मतलब ही नहीं है क्योंकि हम सभी प्राचीन कालीन जीवन जीने को विवश है। जो भी गाड़ी गांव के अंदर आती है उसका टायर खराब होना तय है। गांव के लोग अपना वाहन गांव तक नही लाते है। 2 किलोमीटर पीछे ही अपना वाहन रखते है। सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब प्रसव के दौरान महिला को या किसी बीमारी के दौरान रोगी को अस्पताल पहुंचाना हो एंबुलेंस या किसी भी तरह का वाहन गांव के अंदर घुसना नहीं चाहता क्योंकि गांव के अंदर यदि वहां घुसा तो वाहन का खराब होना तय है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि प्रत्येक वर्ष पूरे गांव में हम लोग चंदा करते हैं जिसके बाद मोरम मंगा कर रास्ता को बनाया जाता है पर बरसात आते ही पुन: रास्ता जैसे का तैसा हो जाता है। वाहन चलना तो दूर पैदल चलने में भी लोगों को मुश्किल हो गया है। जिलिंगसिरा गांव से कुछ दूरी पर बीरो पानी गांव है जहां आदिम जनजाति परिवार के लोग रहते हैं बैठक में आदिम जनजाति परिवार के लोग भी शामिल हुए उन्होंने भी एक स्वर में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है। आदिम जनजाति परिवार का कहना है कि यदि सड़क बन जाएगा तो हम सभी को मुसीबत के समय में प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में थोड़ी सहूलियत होगी। इस मौके पर मुख्य रूप से सोमा उरांव, भारत उरांव, सनीचरवा लोहार, भीखाराम उरांव, लालजू भगत, संतोष उरांव, रीता देवी, सोनामनी देवी, रीना देवी, भिखनी देवी, असमानी देवी, शिवानी कुमारी, अनुपात प्रीति बाड़ा, सुखमण उरांव सहित सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद थे।