24 घण्टे के अंदर दूसरा बड़ा हादसा, तीन मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
– स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान ने उठाया सदन मे मुद्दा
अशोक अनन्त
चतरा: चतरा के प्रसिद्ध संघरी घाटी बना मौत का तांडव लगातार हो रहे दुर्घटना से दहशत का माहौल।चतरा की संघरी घाटी अब बेकसूरों के खून से लाल हो रही है। शुक्रवार को आधा दर्जन ट्रकों के आपस में टकराने के बाद आज अहले सुबह फिर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। एनटीपीसी टंडवा से फ्लाई ऐश लादकर प्रतापपुर जा रहा एक अनियंत्रित हाइवा घाटी के खतरनाक मोड़ पर पलट गया। इस हादसे ने न केवल एक ड्राइवर की जान ली, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी बेनकाब कर दिया है। शनिवार तड़के जब लोग नींद से जाग रहे थे, तब संघरी घाटी में चीख-पुकार मची थी। गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव निवासी 29 वर्षीय राजेंद्र कुमार राय (पिता: सुखलाल रॉय) अपने हाइवा के साथ घाटी पार कर रहे थे। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया और राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। राजेंद्र अपने पीछे एक भरा-पूरा लेकिन अब बेसहारा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी दो छोटी बेटियां और महज एक महीने का दुधमुंहा बेटा है। राजेंद्र की मौत के बाद उनके घर में मातम छाया है। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार राय ने सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा, मेरा भाई चला गया, अब इन तीन छोटे बच्चों को कौन पालेगा? सरकार हमें मुआवजा दे ताकि इन अनाथ बच्चों का भरण-पोषण हो सके। विडंबना देखिए कि बीते कल ही चतरा के विधायक जनार्दन पासवान ने विधानसभा में इस ‘खूनी घाटी’ का मुद्दा उठाया था। लेकिन विधायक के सवाल और सरकार के आश्वासन के बीच एक और जान चली गई। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर कब तक प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा? क्या हर दिन एक नई मौत का इंतजार किया जाएगा? घटना की सूचना मिलते ही चतरा सदर थाना पुलिस मौके पर पहुँची और कड़ी मशक्कत के बाद शव को केबिन से बाहर निकाला। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। संघरी घाटी का यह मोड़ अब मौत का पर्याय नए चुका है। अगर जल्द ही सरकार ने यहाँ सुरक्षा पुख्ता नहीं की, तो न जाने कितने और मासूम अनाथ होंगे। मृतक का बड़ा भाई, राजू कुमार रॉय ने की मुआवजे की मांग।
