वेक्टर जनित रोगों पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला

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रांची। झारखंड में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम व नियंत्रण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दो दिवसीय राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वेक्टर जनित रोग विभाग, झारखंड एवं कैवल्या एजुकेशन फाउंडेशन – पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से होटल रेनड्यू, रांची में हुआ। इसमें सभी 24 जिलों के जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारियों एवं जिला वीबीडी सलाहकारों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा के नेतृत्व में किया गया। उद्घाटन सत्र में मलेरिया, कालाजार, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों, चुनौतियों और आगामी प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों, स्थानीय निकायों और समुदाय का समन्वित सहयोग जरूरी है। उन्होंने जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध कार्रवाई करें, जन-जागरूकता बढ़ाएं और रोगियों की शीघ्र पहचान कर जांच व उपचार सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. रंजीत प्रसाद ने कहा कि रोगों के संचरण को रोकने के लिए संक्रमित रोगियों को मच्छरों के काटने से बचाना सबसे जरूरी है। इसके लिए मच्छरदानी का नियमित उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक रोगी को उपचार के साथ मच्छरदानी भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि ट्रांसमिशन चेन को तोड़ा जा सके।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिला पदाधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करना और उनकी तकनीकी व प्रबंधकीय क्षमता को मजबूत करना था। प्रतिभागियों को जिला एवं प्रखंड स्तर पर आंकड़ों की समीक्षा, रोग के रुझानों की पहचान और राज्य व जिला स्तर के बीच प्रभावी समन्वय पर मार्गदर्शन दिया गया।प्रशिक्षण में बताया गया कि वेक्टर जनित रोगों का नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग से संभव नहीं है। इसके लिए नगर निकाय, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास विभाग सहित ग्राम प्रतिनिधियों, मुखियाओं, स्वयं सहायता समूहों, विद्यालयों और युवाओं की भागीदारी जरूरी है।सत्रों में समुदाय में जागरूकता, संभावित रोगियों की पहचान, जांच-उपचार, नियमित फॉलो-अप और प्रभावित क्षेत्रों में लक्षित अभियान पर चर्चा हुई। कालाजार उन्मूलन के लिए सक्रिय रोगी खोज और मलेरिया की निगरानी व समयबद्ध रिपोर्टिंग को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने अपने जिलों के अनुभव साझा किए और जिला-विशिष्ट समस्याओं के समाधान पर मंथन किया।

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