डॉ बिरेंद्र साहू को झारखंड क्षेत्र मंत्री का दिया गया दायित्व
Ranchi : विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय प्रबंध समिति दो दिवसीय बैठक महाराष्ट्र के जलगांव, देवगिरी प्रांत में आज संपन्न हुई। बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पूज्य संत श्याम चैतन्य जी महाराज ने कहा विश्व हिंदू परिषद देव, देश, धर्म, गौमाता, संत व हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा युवा पीढ़ी को आर्थिक, शैक्षिक, मानसिक एवं बौद्धिक स्तर से सक्षम बनाना हमारा धर्म व कर्तव्य है। पूज्य संत आनंद प्रकाश दास ने कहा विहिप के प्रत्येक कार्यकर्ता गृहस्थ संत के समान है। केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा हिंदू समाज मन से कभी भी पराजय नहीं हुआ है, जिसका परिणाम संघर्ष प्रलक्षित होती है। हिंदू समाज की परंपरा एवं श्रद्धा का प्रमाण कुंभ मेला जैसे अवसर पर संपूर्ण विश्व के हिंदू जनमानस का एकत्र होना सनातन हिंदू समाज के लिए अनुपम क्षण है। विश्व हिंदू परिषद के पालक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक भैया ने कहा संपर्क, संवाद व समन्वय ही संगठनकर्ता का मूल आधार है। कार्यकर्ता किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए उसको क्यों, क्या, कैसे, कब, और किसके साथ लेकर करना है इसका ज्ञान होना चाहिए। नवीन व्यक्तियों को कार्य में योग बनाने की भी गुण हम कार्यकर्ता में होनी चाहिए। समापन सत्र में केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा हिंदू से हिंदू को अलग करने की समाज में अनेक कुचेष्टाएं चल रही है। अपने पंथ को श्रेष्ठ मानने वाले तथाकथित समुदायों ने भारत की संस्कृति, संप्रभुता व स्वाभिमान को कुचलने का प्रयास कर रही है, जिसे हिंदू समाज को समझने की आवश्यकता है। बैठक में संगठित एवं सशक्त हिंदू ही समाज विखंडन के षडयंत्रों का एकमेव समाधान विषय का प्रस्ताव भी पारित की गई। साथ ही साथ विगत 6 माह के समीक्षा एवं आगामी 6 माह के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई। बैठक में केंद्रीय, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय स्तर के कई नवीन दायित्व की घोषणा की गई, जिसमें डॉ बिरेन्द्र साहु को झारखंड-बिहार के क्षेत्र मंत्री व वीरेंद्र बिमल को पटना तथा गुवाहाटी क्षेत्र के धमार्चार्य संपर्क क्षेत्र प्रमुख का दायित्व सौंपा गया। अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, डॉ सुरेंद्र जैन, अंबरीश सिंह, माननीय गोपाल , कोटेश्वर शर्मा आदि केंद्रीय पदाधिकारी ने कई विषयों पर अपने विचार रखें। बैठक में लगभग 350 केंद्रीय, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय प्रतिनिधि उपस्थित थे।
