ओली की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन शुरू, रिहाई की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन करेगी सीपीएन (यूएमएल)

Ek Sandesh Live

Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन शुरू हो गया। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राजधानी में जेन जी आंदोलन की जांच के लिए बने आयोग की रिपोर्ट की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। यूएमएल के केंद्रीय कार्यालय च्यासल के पास कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्की आयोग की रिपोर्ट की प्रति जलाकर प्रदर्शन किया। यहां पुलिस की उपस्थिति न के बराबर रही। वहीं नेपाल की सीपीएन (यूएमएल) ने पार्टी अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी लड़ाई के साथ-साथ देशव्यापी आंदोलन करने का फैसला किया है। यह निर्णय शनिवार को आयोजित पार्टी सचिवालय की आकस्मिक बैठक में लिया गया, जिसमें ओली की तत्काल रिहाई की मांग की गई है।

पार्टी सचिवालय की आकस्मिक बैठक में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का फैसला : पूर्व प्रधानमंत्री ओली की गिरफ्तारी के बाद पार्टी सचिवालय की आकस्मिक बैठक के बाद पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सीपीएन (यूएमएल) ने अपने जनसंगठनों के माध्यम से शनिवार दोपहर 3 बजे सभी जिलों के मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पोखरेल ने कहा कि लोकतंत्र और कानून के शासन का समर्थन करने वाले सभी दलों के साथ संवाद और सहयोग करना, साथ ही नागरिक समाज और आम जनता के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया गया है। उल्लेखनीय है कि ओली और लेखक को आठ और नौ सितंबर 2025 की घटनाओं की जांच करने वाले गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर शनिवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया। आयोग की जांच रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि आठ सितंबर 2025 को हुए जेन जी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तत्कालीन सरकार की लापरवाही और असावधानी के कारण 19 युवाओं की मौत हुई। बता दें कि जेन जी आंदोलन की जांच के लिए सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने विशेष अदालत के पूर्व अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व में जांच आयोग गठित किया था। चुनाव के बाद गठित बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने कल ही कार्की आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया। सरकार गठन के पहले ही दिन इस रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लेने के तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी की गई है।

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