8वें वेतन आयोग के कार्यप्रणाली में तेजी लाये केन्द्र सरकार: परिसंघ

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BY SUNIL VERMA

रांची: केन्द्रीय कर्मचारी एवं अधिकारी परिसंघ बिहार एवं झारखण्ड के अध्यक्ष झारखण्ड सहदेव राम ने बुधवार को डोरण्डा स्थित मजिस्ट्रेट कॉलोनी के परिसंघ कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि देश में लगभग 50 लाख केन्द्रीय कर्मचारी तथा लगभग 65 लाख पेंशन भोगी कर्मचारी है, जिनमें वेतन संरचना, लाभ और भत्ते में संशोधन के लिए केन्द्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया है, जिसे दिनांक-01.01.2026 से लागू होना है। इस सम्बन्ध में मोदी सरकार ने 03 नवम्बर-2025 को अधिसूचना जारी कर आश्वस्त किया है कि आयोग्य 18 माह के अन्दर अपने रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत कर देगी। पिछले 7वें वेतन आयोग का गठन भी 28 फरवरी-2014 को किया गया था तथा आयोग ने अपनी सिफारिश समयावधि के अन्दर प्रस्तुत की थी,किन्तु 8 वें वेतन आयोग की कार्यप्रणाली को देखने से ऐसा नही लग रहा है कि कि आयोग 18 माह के अन्दर रिपोर्ट प्रस्तुत कर पायेगी क्योंकि कुछ दिन पहले ही आयोग का कार्यालय आवंटित हुआ है तथा आयोग की टीम राज्यों का भ्रमण कर वस्तुस्थिति की जानकारी दे रही है। वहीं केन्द्रीय कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी मांग रखी है, जिसमें फिटमेन्ट, फेक्टर, 3.8 या उससे अधिक करने की मांग की जा रही है। यदि फिटमेन्ट फेक्टर 3.83 होता है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर लगभग 68,000 से 69,000 होने का अनुमान है। वहीं वार्षिक वेतन वृद्धि 3 प्रतिशत की जगह 6 प्रतिशत की मांग की गई है। डॉ० राम ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़ना था, जो अब तक नहीं हुआ है, वहीं कोरोना काल में 18 महीने की बकाये महंगाई भत्ते को अब तक भुगतान नहीं किया गया है। परिसंघ के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि वेतन आयोग की अनुशंसा ठीक चुनाव से पहले आये ताकि एक मुद्दा बनें। डॉ० राम ने कहा कि पे कमीशन को पॉलिटिकल मिशन नहीं बनाये सरकार और केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को इस बढ़ती महंगाई से राहत पाने के लिए आयोग की अनुशंसा 18 माह के पहले किया जाये क्योंकि यह डिजीटल युग है तथा प्रधानमंत्री को इस सम्बन्ध में ध्यान देने की आवश्यकता है।

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