भारत-ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली/तेहरान : भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें अमेरिका-इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की गई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को एक्स पर इसकी संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुरुवार रात ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से एक और बातचीत हुई। द्विपक्षीय मामलों के साथ-साथ ब्रिक्स से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि विदेश मंत्री अराघची ने अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए कथित आक्रामक कदमों तथा उनके क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी। अराघची ने कहा कि ईरान की सरकार, जनता और सशस्त्र बल हमलों के खिलाफ अपने वैध आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता की निंदा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। ईरानी विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय सहयोग के मंच के रूप में ब्रिक्स के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस मंच को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता एवं सुरक्षा के समर्थन में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष के बाद से डॉ. जयशंकर और अराघची के बीच यह चौथी बातचीत है। पश्चिम एशिया में संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। पिछली बार की बातचीत में विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा संकट सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।

पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर दिया जोर

इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते संघर्ष और उसके संभावित वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को लेकर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान यह भी रेखांकित किया कि सामान और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही भारत के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति या व्यापारिक मार्गों में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर न केवल भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। प्रधानमंत्री ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने तनाव कम करने और रचनात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि हालात और ज्यादा खराब न हों। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इसके अलावा चाबहार पोर्ट परियोजना भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापार और संपर्क का एक अहम रणनीतिक मार्ग मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार मार्गों और प्रवासी समुदायों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत इन परिस्थितियों में संतुलित कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय शांति, दोनों को साधने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। यह अहम भी है क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे बड़े भारतीय समुदाय पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

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