विधानसभा का बजट सत्र : झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित

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Eksandeshlive Desk

रांची : विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन की कार्यवाही की दूसरी पाली में चर्चा के बाद झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को पारित कर दिया गया। हालांकि इससे पूूर्व वर्ष 2025 में सभा पटल पर प्रस्तूत झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक को वापस ले लिया गया था। मौके पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि वर्ष 2025 के विधेयक में कुछ प्रावधानों में संशोधन और सुधार की जरूरत थी, जिसे देखते हुए विधेयक को वापस लेते हुए संशोधित स्वरूप में 2026 का विधेयक सदन में पेश किया गया था। इस बीच भाजपा के विधायक राज सिन्हा और विधायक अमित यादव ने इस विधेयक को प्रवर समिति के समक्ष भेजने की बात कही। राज सिन्हा ने कहा कि यह विधेयक 135 पृष्ठों का विस्तृत विधेयक है, जिसे पूरी तरह से पढ़ने का समय तक नहीं मिला है। इसपर मंत्री ने कहा कि इसमें केवल मामूली संशोधन किए गए हैं। इस बीच स्पीकर ने कहा कि स्वीकृत निवेदनों को संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में परीक्षा परिणामों को समयबद्ध तरीके से जारी करने पर जोर दिया गया है।

विश्वविद्यालयों को 30 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम जारी करने होंगे

मंत्री सुदिव्य ने कहा कि विश्वविद्यालयों को 30 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम जारी करने होंगे, जबकि अधिकतम सीमा 45 दिन निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक साल में कम से कम दो बार आयोजित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बैठकें भी बुलाई जा सकेंगी। मंत्री ने कहा कि झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग में अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, जैसे प्रधान सचिव या केंद्र सरकार के अधिकारी, को शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है। ताकि प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाया जा सके। विधेयक में छात्रों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए प्लेसमेंट कंपनियों के लिए अलग से कार्यालय की व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया है। इसपर राज सिन्हा ने विश्वविद्यालयों में ही प्लेसमेंट कंपनियों के कार्यालय स्थापित करने का सुझाव दिया। विधायक राज सिन्हा ने कहा कि झारखंड में बडी संख्या युवाओं को प्लेसमेंट के लिए बाहर जाना न पढ़े और बच्चों को पलायन न करना पड़े। इसे ध्यान में रखकर काम करने की जरूरत है। ताकि स्थानीय स्तर पर छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। राज सिन्हा ने कहा कि 2017 के बाद सीनेट की बैठक की कोई जानकारी ही नहीं है। इसपर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि इस विधेयक में तय मानकों के अनुरूप बेहतर व्यवस्था की गई है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए गए हैं। विधेयक पर बहस के दौरान राज सिन्हा ने विधेयक में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता कम होने की आशंका जताई। उन्होंने कुलपति चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग उठाई। इसपर मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि राज्य के दो संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल और मुख्यमंत्री की समिति राज्यहित में निर्णय लेगी। विधेयक में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित कर दिया। इसके साथ ही स्पीकर ने विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही 18 मार्च की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

राज्य कर्मियों को नहीं मिल रहा स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ : चंद्रेश्वर

विधानसभा के बजट सत्र की दूसरी पाली में झारखंड राज्यकर्मी के स्वास्थ्य बीमा योजना में व्याप्त खामियों और अनियमितताओं का मुद्दा सिंदरी के विधायक चन्द्रेश्वर महतो ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से उठाया। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस योजना का लाभ कर्मचारियों तक सही रूप में नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी भी पूर्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं। विधायक ने बताया कि बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार के साथ शुरू की गई इस योजना का वास्तविक फायदा जमीनी स्तर पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बीमा होने के बावजूद कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सदन में एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खूंटी के कनीय अभियंता ज्ञानदेव साहू ने अपने पिता के इलाज पर 6.98 लाख रुपये खर्च किया, लेकिन बीमा कंपनी ने केवल 1.42 लाख रुपये ही स्वीकृत किया, जबकि बाकी राशि परिवार को खुद वहन करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले राज्यभर में सामने आ रहे हैं, जहां इलाज से पहले कैशलेस सुविधा नहीं मिलती। बाद में क्लेम राशि में भारी कटौती की जाती है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्वीकार किया कि योजना में कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कैशलेस इलाज से जुड़े मामलों की जांच कर संबंधित भुगतान कराया जाएगा।

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