नेपाल : पूर्व प्रधानमंत्री देउवा और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच शुरू, पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का गिरफ्तार

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नेपाल में बालेन्द्र शाह की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजू देउवा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच आगे बढ़ाई है। वहीं नेपाली कांग्रेस के नेता तथा पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का को आज सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खड़का ओली सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो ने की है। एक पुराने जमीन पर अवैध कब्जा के मामले में खड़का की गिरफ्तारी हुई है। नेपाल पुलिस की केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो ने खड़का को उनके निवास से गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की भी जांच चल रही है। जेन जी प्रदर्शन के दौरान दीपक खड़का के घर से बड़ी मात्रा में रकम बरामद हुई थी। खड़का पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा के करीबी हैं और ओली की सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे। वो देउवा की पत्नी डॉ. आरजू राणा के बिजनेस पार्टनर भी हैं। काठमांडू के बूढानीलकण्ठ में उनका एक फाइव स्टार रिसोर्ट भी है। इसका मैनेजमेंट हॉलिडे इन ग्रुप करता है।

इस समय सिंगापुर में हैं शेरबहादुर देउवा और उनका परिवार : सत्ता के संरक्षण में अस्वाभाविक और गैरकानूनी संपत्ति अर्जित करने के आरोप में इससे पहले ही देउवा परिवार के खिलाफ संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग में शिकायत दर्ज की गई थी। संपत्ति शुद्धिकरण विभाग के अनुसार, पहले से जुटाई गई सूचनाओं और प्रमाणों को संकलित कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस से जुड़े स्रोतों के मुताबिक, पिछले एक से डेढ़ वर्ष के दौरान शेरबहादुर, आरजू के साथ उनके बेटे जयवीर देउवा और उनके निकट संबंधियों के नाम पर खरीदी गई करीब 73 बीघा जमीन का विवरण संकलित किया गया है। संपत्ति शुद्धिकरण विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक आरजू राणा के दोनों सगे भाइयों प्रदीप शमशेर राणा और भूषण राणा सहित अन्य रिश्तेदारों के खातों में हुए लेन-देन का विवरण भी जुटाया जा रहा है। संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “इसी क्रम में बूढ़ानीलकंठ स्थित देउवा निवास को तोड़ने के काम पर रोक लगाई गई है।” देउवा परिवार ने बूढ़ानीलकंठ में एक ही परिसर के भीतर दो बंगले बनाए थे, जिनको लेकर पहले ही शिकायत दर्ज हो चुकी थी। जेनजी आंदोलन के दौरान देउवा परिवार पर हमला हुआ था और घर में आगजनी की घटना हुई थी। जहां कथित तौर पर करोड़ों रुपये और लाखों अमेरिकी डॉलर के जलने के सबूत भी मिले थे। पिछले कुछ दिनों से देउवा परिवार के निर्देश पर मजदूरों को लगाकर क्षतिग्रस्त भवन को तोड़ने का काम किया जा रहा था। पुलिस स्रोतों के अनुसार, “भवन से जुड़े सबूतों पर असर पड़ने और उनके नष्ट होने की आशंका के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर घर तोड़ने का काम रोक दिया गया है।” नकली भूटानी शरणार्थी प्रकरण में भी आरजू राणा की संलिप्तता की जांच दोबारा शुरू की गई है। नेपाल पुलिस की केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो इस मामले की जांच में जुट गई है। नेपाल में रहे भूटानी शरणार्थी के नाम पर तिब्बती, नेपाली और चीनी नागरिकों को अमेरिका भेजा गया था। इस मामले में प्रति व्यक्ति से 65 लाख रुपए से 1 करोड़ रुपये तक वसूले जाने की बात जांच के सामने आई है। इस समय शेरबहादुर देउवा और उनका परिवार सिंगापुर में हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद देउवा दंपती और उनके परिवार वालों को नेपाल लाने के लिए इंटरपोल से समन्वय किया जा रहा है। नेपाल पुलिस इंटरपोल को पत्र लिख कर देउवा दंपती को नेपाल वापस लाने का आग्रह करने वाली है।

ओली ने जिस पुलिस हेडक्वार्टर का किया था उद्घाटन, उसी में गिरफ्तार कर लाए गए : काठमांडू स्थित जिस पुलिस मुख्यालय का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके गृहमंत्री रहे रमेश लेखक ने किया था, शनिवार को उसी भवन में एक आरोपित के रूप में उन्हें हिरासत में लाया गया। 25 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और गृहमंत्री लेखक ने काठमांडू के भद्रकाली में जिला पुलिस मुख्यालय भवन का उद्घाटन किया था। विडंबना यह है कि उस पुलिस भवन में उद्घाटन के करीब 19 महीने बाद इन दोनों को चर्चित आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लाया गया। ओली और लेखक ने कभी सोचा नहीं होगा कि उन्हें उसी पुलिस हेडक्वार्टर में आरोपी के रूप में हिरासत में रहना होगा, जिसका उन्होंने खुद उद्घाटन किया था। शनिवार सुबह पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलवा कर हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर काठमांडू जिला के पुलिस मुख्यालय में हिरासत में रखा गया था। 8 सितंबर 2025 को हुए जेन जी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से 27 छात्रों की मौत हो गई और इस पूरे घटनाक्रम में कुल 76 लोगों की जान गई थी। इस घटना की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने ओली और लेखक को इन छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इनके खिलाफ हत्या का मामला चलने की सिफारिश की थी। नेपाल में शुक्रवार को बालेन्द्र सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ओली और लेखक को गिरफ्तार करने का फैसला किया गया था जिसके बाद शनिवार सुबह दोनों को गिरफ्तार किया गया। इस समय ओली को काठमांडू के शिक्षण अस्पताल में रखा गया है जबकि पूर्व गृहमंत्री लेखक इसी भवन में हिरासत में बंद हैं।

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