केरल के मुख्यमंत्री चयन को लेकर कांग्रेस में मंथन तेज, दिल्ली में निर्णायक बैठक

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली/तिरुवंनतपुरम : केरल विधानसभा चुनाव में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की बड़ी जीत के बाद अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कांग्रेस में गहन मंथन जारी है। कांग्रेस आलाकमान ने शनिवार को दिल्ली में केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि यदि सहमति बन जाती है तो पार्टी नेतृत्व शनिवार शाम तक मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला सुना सकता है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं के बीच सिमटती दिखाई दे रही है। इनमें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव केसी वेणुगोपाल, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन और वरिष्ठ नेता तथा पूर्व विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला शामिल हैं। तीनों नेताओं को पार्टी और यूडीएफ के अलग-अलग धड़ों का समर्थन प्राप्त है।

सभी पक्षों की राय ली जा रही है और अंतिम फैसला आलाकमान करेगा

पार्टी सूत्रों के अनुसार वेणुगोपाल को बड़ी संख्या में नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों का समर्थन हासिल है। उनके करीबी नेताओं का दावा है कि 45 से अधिक विधायकों ने कांग्रेस पर्यवेक्षकों से मुलाकात कर उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया है। वेणुगोपाल समर्थकों का मानना है कि आलाकमान अंतिम निर्णय लेते समय विधायकों की राय को महत्वपूर्ण आधार बनाएगा। दूसरी ओर वी.डी. सतीशन को यूडीएफ के सहयोगी दलों के कई विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत समर्थन मिल रहा है। राज्य के कई हिस्सों में सतीशन के समर्थन में पोस्टर, फ्लेक्स बोर्ड और सार्वजनिक प्रदर्शन देखे गए हैं। समर्थकों का कहना है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और विपक्ष के नेता के रूप में उनका प्रदर्शन उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार बनाता है। इस बीच रमेश चेन्निथला भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बने हुए हैं। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि यदि आलाकमान वेणुगोपाल और सतीशन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस करता है तो चेन्निथला एक सर्वमान्य और समझौता उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं। इन सबके बीच केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने कहा कि मुख्यमंत्री चयन को लेकर औपचारिक चर्चाएं शुरू हो गयी हैं। पार्टी के भीतर सभी पक्षों की राय ली जा रही है और अंतिम फैसला आलाकमान करेगा। सन्नी जोसेफ ने कहा कि उन्होंने राज्य में कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनिर्वाचित विधायक के. मुरलीधरन ने भी संकेत दिए कि अगले 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चयन केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं होगा, बल्कि विधायकों, गठबंधन सहयोगियों और जनता की भावना को भी ध्यान में रखा जाएगा। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यूडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) वीडी सतीशन के पक्ष में झुकाव बनाए हुए है। इससे सतीशन की दावेदारी को अतिरिक्त राजनीतिक मजबूती मिली है। उधर, कांग्रेस आलाकमान द्वारा नियुक्त दो पर्यवेक्षकों ने एक दिन पहले शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में विधायकों की राय और राजनीतिक परिस्थितियों का विस्तृत आकलन शामिल बताया जा रहा है। इसके बाद अब अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व के हाथ में है। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में जारी बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला, सन्नी जोसेफ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधायकों की संख्या, गठबंधन समीकरण और जनभावना के बीच संतुलन बनाकर ऐसा फैसला लेने की है, जिससे सरकार स्थिर और मजबूत बने। राजनीति के जानकारों का मानना है कि राज्य में यूडीएफ की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल ने कांग्रेस के भीतर सक्रिय लॉबिंग और शक्ति प्रदर्शन को भी उजागर कर दिया है। अब पूरे देश की नजरें कांग्रेस आलाकमान के उस फैसले पर टिकी हैं, जो केरल की नई सरकार की दिशा तय करेगा।

तमिलनाडु में अनिश्चितता बरकरार, पलानीस्वामी ने की विधायकों के साथ बैठक

चेन्नई : तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी उठापटक के बीच अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी के महासचिव एदप्पाड़ी के. पलानीस्वामी ने शनिवार को चेन्नई स्थित अपने आवास पर पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर मौजूदा राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा की। दरअसल, राज्य में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में विभिन्न दल समर्थन जुटाने और गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने भी पार्टी विधायकों को एकजुट रखने और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर बनाए रखने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ग्रीनवेज रोड स्थित आवास पर हुई बैठक में संभावित गठबंधन, समर्थन की स्थिति, विधायकों की एकजुटता तथा भविष्य की राजनीतिक रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों से किसी भी परिस्थिति में संयम बनाए रखने और पार्टी लाइन के अनुसार आगे बढ़ने की अपील की। इससे पहले अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एम. थाम्बिदुराई ने बयान दिया था कि तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री एदप्पाड़ी के. पलानीस्वामी ही होंगे। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में अन्नाद्रमुक की भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। दूसरी ओर जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्त्री कज़गम (टीवीके) लगातार सरकार बनाने के प्रयासों में जुटी हुई है। विजय अब तक तीन बार राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश कर चुके हैं, लेकिन पार्टी अभी भी बहुमत के आवश्यक आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है। इससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है। इसी बीच अन्नाद्रमुक गठबंधन में शामिल अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कज़ागम (एएमएमके) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी महासचिव टी. टी. वी. धिनाकरन ने राज्यपाल से मुलाकात कर आरोप लगाया कि टीवीके द्वारा उनके एक विधायक से संपर्क कर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। उन्होंने राज्य में “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए निष्पक्ष राजनीतिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच अन्नाद्रमुक गठबंधन में शामिल दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आने वाले दिनों में पार्टी किस तरह की रणनीति अपनाएगी और यदि राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो उसका अगला कदम क्या होगा। राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए पिछले दो दिनों से अन्नाद्रमुक विधायकों को पुडुचेरी के एक निजी होटल में ठहराया गया था, ताकि किसी तरह की टूट-फूट की संभावना को रोका जा सके। अब सभी विधायकों को चेन्नई स्थित एदप्पाड़ी के. पलानीस्वामी के आवास पर बुला लिया गया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्त्री कज़गम 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 47 सीटें मिली हैं और पार्टी तीसरे स्थान पर रही। ऐसे में तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन और समर्थन का गणित आने वाले दिनों में निर्णायक साबित हो सकता है।

पुडुचेरी में 13 मई को पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे एन. रंगास्वामी

पुदुचेरी : केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को बहुमत मिलने के बाद एन. रंगास्वामी 13 मई को पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राजभवन में आयोजित होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इससे पहले राजग विधायक दल की बैठक में शुक्रवार को एन. रंगास्वामी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने देर रात उपराज्यपाल कैलाशनाथन से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश किया। इस दौरान उन्होंने 18 समर्थक विधायकों के समर्थन पत्र भी सौंपे। नई सरकार के गठन की प्रक्रिया के साथ ही मंत्रिमंडल के स्वरूप और विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रंगास्वामी ने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ बैठक कर संभावित मंत्रिमंडल और सत्ता साझेदारी को लेकर विचार-विमर्श किया। मंडाविया पुडुचेरी चुनाव के प्रभारी भी रहे हैं और चुनावी रणनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 18 मई को नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की भी चर्चा है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच एन. रंगास्वामी ने गठबंधन सहयोगी भाजपा को उपमुख्यमंत्री पद और दो मंत्री पद देने की घोषणा की है। इससे साफ संकेत मिलता है कि नई सरकार में भाजपा की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली हो सकती है। उल्लेखनीय है कि पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान कराया गया था। इस चुनाव में रिकॉर्ड 90.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे केंद्रशासित प्रदेश के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक मतदान प्रतिशतों में से एक माना जा रहा है। 4 मई को घोषित चुनाव परिणामों में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया। चुनाव परिणामों के अनुसार, ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 4 सीटें मिलीं। इसके अलावा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और देशीय मुर्पोक्कु द्रविड़ कझगम ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। इस प्रकार राजग गठबंधन ने कुल 18 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।

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