नई श्रम संहिताओं पर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने उठाए सवाल

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन श्रम संहिताओं को मजदूर-विरोधी बताते हुए सरकार पर श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। खरगे ने सोमवार को एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनावों के बाद राजपत्र अधिसूचनाओं के जरिए चार नई श्रम संहिताओं को लागू किया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से ‘हायर एंड फायर’ की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है और करोड़ों श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने वेतन संहिता 2019 पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मूल वेतन को कुल वेतन का 50 प्रतिशत अनिवार्य करने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाली राशि प्रभावित हो सकती है। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता 2020 को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को आपराधिक दायरे से बाहर करने से श्रमिक हित प्रभावित हो सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 पर कांग्रेस ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए स्पष्ट लाभ व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ज़ोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग मज़दूरों के लिए बीमा या फंडिंग का कोई स्पष्ट मॉडल नहीं है। 90 प्रतिशत असंगठित मज़दूरों के लिए ये लाभ केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के तहत हड़ताल से पहले नोटिस अवधि बढ़ाने और 300 कर्मचारियों तक की इकाइयों में छंटनी संबंधी प्रावधानों को लेकर भी विपक्ष ने चिंता जताई है। खरगे ने कहा कि हड़ताल से पहले 60 दिन का नोटिस अनिवार्य कर दिया गया है। अब 300 कर्मचारियों वाली कंपनियां बिना सरकारी अनुमति के छंटनी कर सकेंगी जबकि पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों तक की इकाइयों पर लागू थी। खरगे ने कहा कि कांग्रेस न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, मनरेगा के विस्तार, असंगठित श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और ठेका प्रथा पर नियंत्रण जैसे मुद्दों के लिए प्रतिबद्ध है।

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