Eksandeshlive Desk
रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने वायरल वीडियो मामले में धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है। सोमवार को एक क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान न्यायालय के आदेश के आलोक में धनबाद एसएसपी सशरीर अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान एसएसपी की ओर से अदालत को बताया गया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली गई है। इसके बाद न्यायालय ने उनका पक्ष सुनते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि निर्धारित की गई है। यह सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। अदालत ने एसएसपी को निर्देश दिया कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई के दौरान विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।
अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि युवती का वायरल वीडियो झारखंड के बजाय गुजरात से प्रसारित हुआ था। इस पर न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस को वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद उसे हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। दरअसल, इस मामले में अपीलकर्ता रवि साव को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। इसके बाद पीड़िता ने उनकी जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर की। पीड़िता का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद भी अपीलकर्ता ने अवैध गतिविधियों को जारी रखा। इस संबंध में उसने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। युवती का कहना है कि उसी क्रम में उसका वीडियो वायरल हुआ। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद पुलिस ने प्रारंभ में एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इस पर उच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा था कि जब शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट खुलासा हो रहा था, तब एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों की गई।
