Eksandeshlive desk
काठमांडू : काठमांडू में रविवार को मदन भंडारी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में नेपाल के चार पूर्व प्रधानमंत्री तथा प्रमुख वामपंथी नेता एक ही मंच पर नजर आने वाले हैं। इस कार्यक्रम को देश की राजनीति में वाम एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम की विशेष बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की पहल पर विभिन्न वाम दलों के शीर्ष नेताओं को एक मंच पर आमंत्रित किया गया। लंबे समय बाद प्रमुख वाम नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
रविवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में माओवादी सुप्रीमो पुष्कमल दहाल प्रचंड, पूर्व प्रधानमंत्री सीपीएन यूएमएल के अध्यक्ष के पी शर्मा ओली, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल तथा खलनाथ खनाल के सहभागी होने की जानकारी दी गई है। हालांकि इस कार्यक्रम में एक और पूर्व प्रधानमंत्री डा बाबूराम भट्टराई को भी आमंत्रित किया गया है लेकिन उनकी उपस्थिति अभी तय नहीं है। माओवादी नेता प्रचंड का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक सभा नहीं, बल्कि वामपंथी शक्तियों को एकजुट करने की संभावित शुरुआत हो सकता है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस तरह की बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए पुष्पकमल दाहाल प्रचंड ने अपने कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिए। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, एकजुटता कायम रखने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। प्रचंड के बयान को वाम एकता के संभावित प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके संकेतों ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। कार्यक्रम के बाद वाम दलों के बीच सहयोग और एकता की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
