रिपोर्ट : हेमन्त अहीर
रांची| झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर 22 जुलाई को डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान में ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद–2026’ का आयोजन होगा। सुबह 10 बजे से शाम 6:50 बजे तक चलने वाले कार्यक्रम में नौ भाषाओं के विद्वान, शिक्षक, शोधार्थी और भाषा प्रेमी भाषाओं की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन सत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की सहित नागपुरी, खड़िया, मुंडारी, खोरठा, कुड़ुॅंख़, पंचपरगनिया, संताली, हो और कुरमाली भाषा के प्रमुख विद्वान शामिल होंगे। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक भाषावार परिचर्चा होगी, जबकि दोपहर 2 से 3 बजे तक भाषाविदों और प्रतिभागियों के बीच खुला संवाद होगा।
अलग बजट और भाषा अकादमी की उठेगी मांग
संवाद के बाद 11 प्रमुख मांगों पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इनमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के लिए अलग बजट, शिक्षकों की नियमित नियुक्ति, प्रत्येक बीएड कॉलेजों में 15-15 सीटें आरक्षित, ‘झारखंडी भाषा अकादमी’ की स्थापना और विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र भाषा विभाग खोलने की मांग प्रमुख है। विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अलग छात्र कल्याण कोष बनाने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शाम 6 बजे ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा समिति’ का गठन होगा और आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी। साथ ही 10 सितंबर को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा यात्रा निकालने का प्रस्ताव रखा जाएगा। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
