पीपलकोटी सुरंग हादसा: मलबे में जिंदगी की तलाश, सेना समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू में जुटीं, सात श्रमिकों की मौत, तीन की तलाश जारी

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Eksandeshlive Desk

देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल रेस टनल में पानी और मलबा भरने से हुए हादसे में सात श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि तीन अब भी लापता हैं। हादसे के बाद 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत एवं बचाव अभियान शुक्रवार को भी दिनभर युद्धस्तर पर जारी रहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद कीमती है और सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हादसा गुरुवार शाम टनल के टीआरटी फेज-II में हुआ, जब अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा टनल में घुस गया। घटना के समय हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के श्रमिक टनल में काम कर रहे थे। अचानक पानी और मलबा आने से श्रमिक अंदर फंस गए। बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, सीआईएसएफ और अन्य एजेंसियों की टीमें जुटी हैं।

रेस्क्यू अभियान के दौरान टनल से पानी और मलबा निकालने और बचाव दलों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं। टनल के भीतर पानी का स्तर और मलबा बचाव कार्य में चुनौती बने हुए हैं। बचाव दल लापता तीन श्रमिकों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार टनल में फंसे 22 श्रमिकों में से 19 को बाहर निकाला जा चुका है,जिनमें सात की अस्पताल में मौत हो गई। शेष तीन श्रमिकों की तलाश जारी है। बचाव अभियान में सेना की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) टीम को भी लगाया गया है। जोशीमठ से पहुंची सेना की टीम में अधिकारी, जेसीओ, जवानों के अलावा प्रशिक्षित के-9 और चिकित्सा दल शामिल हैं। टीम ने टनल के भीतर जाकर स्थिति का आकलन किया और बचाव कार्य में सहयोग किया। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, 36 आईटी पार्क पहुंचकर घटना की समीक्षा एवं निगरानी की। जिलाधिकारी चमोली मौके पर मौजूद रहकर राहत एवं बचाव अभियान का पर्यवेक्षण कर रहे हैं। वर्तमान में स्थानीय थाना एवं पुलिस चौकी के 22 कर्मियों, सीआईएसएफ के 25 जवानों, एनडीआरएफ-105 के 105 बचाव कर्मियों एवं डॉग स्क्वॉड, एसडीआरएफ के 42 बचाव कर्मियों, सेना के 53 जवानों, आईटीबीपी के 52 जवानों, डीआरएफ के चार बचाव कर्मियों, फायर सर्विस के 14 कर्मियों, जिला प्रशासन, मेडिकल टीम और एचसीसी कंपनी की मशीनों और मानव संसाधन की मदद से खोज एवं बचाव कार्य चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ESF-9 सर्च एंड रेस्क्यू को भी सक्रिय किया गया है। टनल में फंसे/लापता श्रमिकों तक पहुंचने के लिए विभिन्न एजेंसियां उपलब्ध संसाधनों और विशेष उपकरणों के साथ लगातार अभियान चला रही हैं। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। कंपनी ने कहा है कि लापता श्रमिकों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रभावित श्रमिकों और उनके परिजनों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। हादसे के कारणों और परिस्थितियों का विस्तृत आकलन सक्षम एजेंसियों के समन्वय से किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से रेस्क्यू की प्रगति की जानकारी ली और कहा कि प्रत्येक श्रमिक का जीवन बेहद कीमती है और सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल श्रमिकों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों को घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस बीच मौसम विभाग ने चमोली में 14 अगस्त को कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। 14 से 17 अगस्त के दौरान भारी बारिश के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टान गिरने से सड़क, राजमार्ग ओर अन्य ढांचों के प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन ने बचाव अभियान के साथ मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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