राजनीति चमकाने के लिए एमएमडीआर संशोधन बिल पर हेमंत सोरेन भ्रम ना फैलाएं : आदित्य साहू

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Eksandeshlive Desk

रांची: संसद से पारित एमएमडीआर संशोधन बिल पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान और रुख पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पलटवार किया है। उन्होंने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झारखंड की हेमंत सरकार पर इस विधेयक के बहाने जनता को गुमराह करने और केवल राजनीति चमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा है कि वह इस मामले पर भ्रम और गुमराह की राजनीति न करें। इस विधेयक को लेकर झामुमो सहित विपक्ष की सारी आशंकाएं एवं आरोप, सिर्फ बेबुनियाद और निराधार है। साहू ने कहा है कि सेस का विषय तो पूरे देश के लिए है। यह एकरूपता लाने का प्रयास है। वन नेशन, वन टैक्स की बात आज देश में हो रही है। सेस के नाम जो लूट हो रही है, उस पर विराम लगेगा। वैसे भी देश के लोगों को अपने से अधिक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है कि वे वैसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे देश के लोगों को थोड़ा भी अहित हो। साहू ने कहा कि अगर छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई से फुर्सत मिल गई हो तो मुख्यमंत्री को थोड़ा संविधान भी पढ़ लेनी चाहिए। भारत एक संघीय गणराज्य है, जिसमें केंद्र और राज्य की शक्तियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। संविधान और व्यवस्था के दायरे में समाधान खोजने के बजाय केंद्र से टकराव खड़ा करना कतई राज्यहित नहीं है। छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए अपनी पार्टी झामुमो को खुलेआम आंदोलन के लिए उकसाना भी झारखंड के हित में नहीं है। उन्होंने झामुमो एवं मुख्यमंत्री को मामले को डायवर्ट नहीं करने का सुझाव दिया है।

साहू ने कहा कि यह विधेयक विकसित भारत की दिशा में सकारात्मक कदम साबित होगा। यह खनन क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेशक-अनुकूल बनाता है। यह निवेश, उत्पादन, विनिर्माण, अवसंरचना, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। साहू ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भूमि और खनिजों पर राज्यों के किसी भी अधिकार को समाप्त नहीं करता और न ही राज्यों द्वारा खनिजों पर लगाए और वसूल किए जाने वाले किसी कर को समाप्त करता है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों को कर लगाने से नहीं रोक रही है। बल्कि इस संशोधन के माध्यम से यह प्रावधान किया जा रहा है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप कर, सेस या अन्य अधिभार लगा सकती है, ताकि खनिज क्षेत्र में एकरूपता और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इससे खनिज-युक्त राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से होने वाली आय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह विधेयक राज्यों को प्राप्त होने वाले राजस्व को कम नहीं करता। राज्यों को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से होने वाले लाभ और जीएसटी (जीएसटी) में उनकी हिस्सेदारी मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजनाओं के बंद होने का डर दिखाकर लोगों की सहानुभूति बटोरना चाहती है परंतु राज्य की जनता इनका सारा पैंतरा समझ रही है। हेमन्त सरकार पहले यह बतलाए कि खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक होने के बावजूद उनकी सरकार सात वर्षों के कार्यकाल में झारखंड में केवल 3 खनिज खदानों की ही नीलामी ही क्यों करा सकी है। जबकि इस दौरान पूरे देश में 434 खनिज ब्लॉक की नीलामी हुई है। पड़ोसी राज्य ओडिशा में 45, छत्तीसगढ़ में 49 खदानों की नीलामी हुई। इससे झारखंड में राजस्व भी कम प्राप्त हुआ है। जबकि उन राज्यों को भारी राजस्व प्राप्त हुआ है। झारखंड को मौजूदा खदानों पर अतिरिक्त कर भार डालने की बजाय, इस क्षेत्र से प्राप्त होने वाले राजस्व के इस नए स्रोत का उपयोग करना चाहिए। साहू ने कहा कि हेमंत सरकार को बहुत राज्य के खनिज संपदाओं की चिंता है तो उनके सात वर्ष के कार्यकाल में झारखंड में खनिज संपदाओं की जो ऐतिहासिक लूट हुई है, वह किसी से छिपा नहीं है। हेमंत सोरेन दोनों हाथों से इसे लुटवाते रहे हैं, सरकार ने उस पर विराम क्यों नहीं लगाया। पूरे खनिज संपदा को बेचने का काम इस सरकार ने किया है।

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