1 अक्टूबर 2026 को एक दिन, एक घंटा, एक साथ के तहत एक साथ स्वच्छता गतिविधियां की जाएंगी आयोजित।
Eksandeshlive Desk
वर्ष 2014 में शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन (SBM) केवल शौचालय निर्माण से आगे बढ़कर एक व्यापक स्वच्छता आंदोलन बन चुका है, जिसके अंतर्गत अपशिष्ट प्रबंधन, व्यवहार परिवर्तन और नागरिक भागीदारी शामिल हैं। वर्ष 2017 में शुरू किया गया स्वच्छता ही सेवा (SHS) एक समर्पित अभियान है, जो नागरिकों और संस्थाओं को सामूहिक स्वच्छता गतिविधियों के लिए एक वार्षिक मंच प्रदान करता है। बदलते वर्षों के साथ, SHS भी स्वच्छता प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित हुआ है, जिसमें प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, विज़ुअल क्लीनलीनेस और कचरा-मुक्त सार्वजनिक स्थलों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। वर्ष 2023 और 2024 के संस्करणों ने बड़े पैमाने पर श्रमदान, सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प, युवा भागीदारी, सफाईमित्र कल्याण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से अभियान का और विस्तार किया। SHS 2025 ने स्वच्छोत्सव, स्वच्छ सार्वजनिक स्थलों, सफाईमित्र पहल और पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों के ज़रिये स्वच्छता को सामुदायिक आयोजनों से जोड़ा। SHS 2026 इस विकास यात्रा को “स्वच्छता में सहभाग” थीम के साथ आगे बढ़ा रहा है, जिसमें सामूहिक स्वामित्व, युवा सहभागिता, अपशिष्ट-प्रबंधन की ज़िम्मेदारियों और निरंतर स्वच्छता अभ्यासों पर बल दिया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन: स्वच्छ भारत का निर्माण
2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन (SBM) सरकार के नेतृत्व वाले सबसे बड़े स्वच्छता आंदोलनों में से एक है। महात्मा गांधी की सोच थी कि “स्वच्छता ईश्वर भक्ति के समान है।” इस लोगो ने ब्रांड वैल्यू बनाने और दुनियाभर में स्वच्छता की भावना का प्रतिनिधित्व करने में मदद की। इसने लोगों को SBM के साथ आसानी से और तेज़ी से जुड़ने में भी सहयोग दिया।
इस मिशन के दो घटक हैं: स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U)। SBM-G ग्रामीण स्वच्छता, शौचालयों तक पहुंच, उनके उपयोग, और ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है। वहीं SBM-U शहरी स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक स्थलों और स्वच्छता से जुड़ी अवसंरचना पर केंद्रित है।
इस मिशन का प्रभाव अब भारत के गांवों और शहरों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्रामीण भारत को 2019 में खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया था। इसके अतिरिक्त, 17 सितंबर 2026 तक, भारत में 5.69 लाख से अधिक गांव ODF प्लस बन चुके हैं और 5.25 लाख से अधिक गांवों ने ODF प्लस मॉडल का दर्जा हासिल कर लिया है। 5.38 लाख से अधिक गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और 5.65 लाख से अधिक गांवों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था स्थापित की जा चुकी है। 585 ज़िलों में कुल 1,314 गोवर्धन (GOBARdhan) बायोगैस संयंत्र वर्तमान में संचालित हैं। ग्रामीण घरेलू स्तर पर 12.22 करोड़ व्यक्तिगत शौचालय और 98,273 बायोगैस संयंत्र बनाए गए हैं।
ODF प्लस और ODF प्लस मॉडल गांव
एक ODF प्लस गांव न केवल ODF का दर्जा बनाए रखता है, बल्कि दृश्य स्वच्छता सुनिश्चित करते हुए ठोस और तरल अपशिष्ट का प्रभावी प्रबंधन भी करता है। ODF प्लस दर्जे को बनाए रखने के साथ-साथ, इन गांवों को तीन प्रगतिशील चरणों में वर्गीकृत किया गया है: आकांक्षी (Aspiring), उभरते (Rising), और मॉडल (Model)। आकांक्षी गांव ठोस या तरल अपशिष्ट में से किसी एक का प्रबंधन करते हैं। उभरते गांव ठोस और तरल दोनों प्रकार के अपशिष्ट का प्रबंधन करते हैं। मॉडल गांव, दोनों प्रकार के अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा, दृश्य स्वच्छता प्रदर्शित करते हैं और ODF प्लस संदेशों का प्रसार करते हैं।
शहरी क्षेत्रों में, 95,478 वार्डों में 100% घर-घर से ठोस कचरा संग्रहण (डोर-टू-डोर कलेक्शन) और 83,963 वार्डों में स्रोत पर ही 100% कचरा पृथक्करण की सुविधा उपलब्ध है। भारत में 3,254 ठोस अपशिष्ट-से-खाद संयंत्र हैं, जो प्रतिदिन 1.39 लाख टन कचरे का प्रसंस्करण करते हैं, और 60 ठोस अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र हैं, जो प्रतिदिन 25,759.50 टन कचरे का प्रसंस्करण करते हैं। इसके अतिरिक्त, 1,112 सीवेज शोधन संयंत्र प्रतिदिन 41,020.63 मेगालीटर और 1,131 मल कीचड़ शोधन संयंत्र (FSTP) प्रतिदिन 95,371 किलोलीटर तरल अपशिष्ट का प्रसंस्करण कर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में 68,339 सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाएं हैं, जिनमें 37,766 सार्वजनिक शौचालय, 25,512 सामुदायिक शौचालय और 5,061 मूत्रालय शामिल हैं। इस प्रकार, SBM केवल शौचालय निर्माण से विकसित होकर एक समग्र और सतत स्वच्छता प्रणाली बन गया है। व्यवहार परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक भागीदारी अब इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण अंग हैं। इतने बड़े पैमाने पर व्यवहार परिवर्तन कई राष्ट्रीय स्तर के अभियानों के माध्यम से संभव हो सका है, जिनमें सब से प्रमुख ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान है।
स्वच्छता ही सेवा : स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना
स्वच्छता ही सेवा (SHS) वर्ष 2017 से प्रतिवर्ष आयोजित की जा रही है। यह अभियान ‘स्वच्छ भारत दिवस’ से पहले आयोजित होता है, जो प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह नागरिकों को स्वैच्छिक श्रम और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करता है। यह अभियान SBM के व्यापक ‘जन भागीदारी’ दृष्टिकोण से उपजा है। यह नागरिकों, संस्थाओं और सरकारों को स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयास करने का एक समर्पित अवसर प्रदान करता है। हाल ही में, 17 सितंबर 2026 को SHS 2026 का शुभारंभ किया गया।
स्वच्छता ही सेवा 2026: स्वच्छता में सहभाग
SHS 2026 वर्तमान में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक संचालित हो रहा है। इसका विषय (थीम) “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” है। यह अभियान ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) और ‘संपूर्ण समाज’ (Whole of Society) दृष्टिकोण का अनुसरण करता है। इसमें युवाओं, हितधारकों की ज़िम्मेदारियों और सामूहिक स्वामित्व पर विशेष ज़ोर दिया गया है। यह अभियान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रति भी जागरूकता बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य सभी हितधारकों के बीच ज़िम्मेदारियों की समझ को सुदृढ़ करना है। SHS 2026 के हिस्से के रूप में, स्थानीय निकायों, सरकारी संस्थानों और नागरिकों द्वारा निम्नलिखित पांच मुख्य स्तंभों पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं:
1 स्वच्छता लक्षित इकाइयों (CTUs) का कायाकल्प और स्वच्छ सार्वजनिक स्थल, 2. स्वच्छ पाठशाला – स्वच्छता के लिए युवा, 3. सफाईमित्र सुरक्षा सेवा एवं सम्मान शिविर, 4. स्वच्छता के लिए जन भागीदारी, 5. स्वच्छता से समृद्धि
इसके अलावा, 1 अक्टूबर 2026 को एक दिन, एक घंटा, एक साथ के तहत एक साथ स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। नागरिकों, युवा समूहों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और संस्थानों को इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाएं SHS गतिविधियों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 पर चर्चा करेंगी। शहरी स्थानीय निकाय भी विशेष बोर्ड बैठकों का आयोजन करेंगे। इस प्रकार, SHS 2026 स्वच्छता, व्यवहार परिवर्तन, युवा सहभागिता और अपशिष्ट प्रबंधन को एक साथ जोड़ता है। यह स्वच्छता कर्मियों और सार्वजनिक स्वच्छता अवसंरचना की ओर भी ध्यान केंद्रित करता है। यह दृष्टिकोण स्वच्छता को केवल एक गतिविधि मानने के बजाय इसे एक सामूहिक आदत और ज़िम्मेदारी बनाने के व्यापक बदलाव को दर्शाता है।
वर्ष 2026 के इस अभियान को सही संदर्भ में समझने के लिए, पिछले वर्षों में SHS के क्रमिक विकास को जानना आवश्यक है। इसके प्रमुख केंद्र बिंदु और विषय निरंतर स्वच्छता व्यवहार की दिशा में एक क्रमिक बदलाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2017 में अपनी शुरुआत के बाद से, उभरती स्वच्छता प्राथमिकताओं के आधार पर अभियान के मुख्य क्षेत्रों, इसके पैमाने और कार्यक्षेत्रों का निरंतर विस्तार हुआ है।
स्वच्छता ही सेवा 2017: जन-नेतृत्व आंदोलन की शुरुआत
पहला SHS अभियान 15 सितंबर 2017 को शुरू किया गया था। इसके शुभारंभ पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ की शपथ दिलाई गई और देशव्यापी भागीदारी का आह्वान किया गया। नागरिकों को श्रमदान के माध्यम से सीधे तौर पर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। श्रमदान (निःस्वार्थ सेवा) का तात्पर्य सामुदायिक कल्याण के लिए सामुदायिक सेवा या स्वैच्छिक योगदान से है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत, श्रमदान पूरी तरह स्वच्छता गतिविधियों पर केंद्रित है। वर्ष 2014 से 2017 तक 4.82 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो चुका था। खुले में शौच मुक्त (ODF) गांवों की संख्या 2.38 लाख तक पहुंच गई थी। व्यक्तिगत शौचालय कवरेज 2014 के 42% से बढ़कर 2017 में 64% हो गया था।
SHS 2017 में व्यापक जनभागीदारी देखी गई। स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि चित्रकला प्रतियोगिता में कुल 2.46 करोड़ बच्चों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। अभियान ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक असर दिखाया; इसके लॉन्च के दिन #SwachhataHiSeva शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल रहा। बाद में नागरिकों ने इस हैशटैग का उपयोग अपने श्रमदान और स्वच्छता गतिविधियों को ऑनलाइन साझा करने के लिए किया। अन्य पहल में स्वच्छता अभियान, सैनिटेशन गतिविधियां और खुले में शौच के प्रति संवेदनशील स्थानों पर विशेष कार्रवाई शामिल थी। स्वयं सहायता समूहों (SHGs), NGOs और स्थानीय समुदायों ने इस प्रकार की कई गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
स्वच्छता ही सेवा 2018: स्वच्छता के लिए जन आंदोलन को मजबूत बनाना
SHS 2018 का आयोजन 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक किया गया था। SHS 2018 ने जन भागीदारी के दृष्टिकोण को सशक्त किया और इस विचार को दृढ़ किया कि ‘स्वच्छता हर किसी का काम है’। इसने छात्रों, स्वच्छाग्रहियों (ग्राम पंचायत स्तर पर समर्पित, प्रशिक्षित और उचित रूप से प्रोत्साहित स्वच्छता कार्यकर्ता), निगरानी समितियों (जो ग्रामीणों को खुले में शौच न करने के लिए प्रेरित करती हैं), महिला नेतृत्वकर्ताओं, युवा समूहों, प्रतिष्ठित हस्तियों और सामुदायिक संगठनों को एक मंच पर लाने का कार्य किया। अभियान ने ग्राम सभाओं, रेलवे स्टेशनों, प्रमुख ऐतिहासिक/प्रतिष्ठित स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियों का विस्तार किया। 16 सितंबर को स्वच्छता सभाओं का आयोजन हुआ। स्थानीय स्वच्छता की समीक्षा के लिए गांवों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की गईं, जहां भविष्य की स्वच्छता गतिविधियों के लिए कार्ययोजनाएं भी तैयार की गईं।
एक मिशन कई आवाज़ें : स्वच्छता के लिए एकजुट हुआ भारत
स्वच्छता ही सेवा 2018 ने स्वच्छता के एक सामूहिक प्रयास के लिए पूरे भारत के लोगों को एकजुट किया। डिब्रूगढ़ के स्कूली बच्चों, दंतेवाड़ा और सेलम की महिला स्वच्छाग्रहियों, तथा बिजनौर में गंगा की सफाई कर रहे स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर के अपने प्रयास साझा किए। प्रमुख हस्तियों में श्री अमिताभ बच्चन ने मुंबई के एक समुद्र तट की सफाई का अनुभव साझा किया, जबकि श्री रतन टाटा ने प्रत्येक नागरिक के लिए इस आंदोलन में योगदान देने को सम्मान की बात बताया। पैंगोंग झील से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने भाग लिया, वहीं दैनिक जागरण जैसे मीडिया घरानों, सहकारी समितियों, रेलवे कर्मचारियों और आम नागरिकों ने भी अपने प्रयास जोड़े। इन सभी आवाज़ों ने मिलकर सरकार के इस संदेश को पुख्ता किया कि स्वच्छ भारत केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे देश का आंदोलन है।
स्वच्छता ही सेवा 2019: प्लास्टिक कचरे पर ध्यान केंद्रित
SHS 2019 का आयोजन 11 सितंबर से 2 अक्टूबर तक किया गया। यह अभियान विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और उसके प्रबंधन पर केंद्रित था। नागरिकों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अभियान ने कपड़े और जूट के थैलों जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया। 2 अक्टूबर को प्लास्टिक कचरा एकत्र करने और उसे अलग करने के लिए राष्ट्रव्यापी श्रमदान आयोजित किया गया। श्रमदान के ज़रिये एकत्र किए गए प्लास्टिक के पुनर्चक्रण (रिसाइकिलिंग) या उचित निपटान की व्यवस्था की गई।
स्वच्छता ही सेवा 2021: विजुअल क्लीनलीनेस संस्कृति का निर्माण
SHS 2021 का आयोजन 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक किया गया। इसका उद्देश्य गांवों में ODF प्लस गतिविधियों में तेज़ी लाना और ODF उपलब्धियों को बनाए रखना था। अभियान ने जागरूकता को सामुदायिक लामबंदी के साथ जोड़ा। SHS 2021 के दौरान, 1.5 लाख से अधिक श्रमदान गतिविधियों में 60 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। 1 अक्टूबर 2021 तक 43,000 से अधिक ग्राम सभाओं ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए।
SHS 2021 की एक प्रमुख विशेषता सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह रथ यात्रा थी। स्वच्छता जागरूकता फैलाने के लिए 783 से अधिक स्वच्छता रथों ने ज़िलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया। इस अभियान ने स्वच्छता श्रमदान और 37,507 स्वच्छता जागृति यात्राओं के ज़रिये जागरूकता को प्रत्यक्ष सामुदायिक भागीदारी से जोड़ा। अकेले स्वच्छ भारत दिवस पर लगभग 6.4 लाख लोगों ने 2.4 लाख से अधिक श्रमदान गतिविधियों में भाग लिया। SHS 2021 ने ग्रामीण समुदायों तक स्वच्छता संदेश पहुंचाने के लिए विभिन्न संचार माध्यमों का उपयोग किया। 9,401 वॉल पेंटिंग्स, रैलियों और कई नारों के माध्यम से गांवों में ODF प्लस के संदेश प्रसारित किए गए। अभियान ने स्वच्छता चैंपियंस को सम्मानित व पुरस्कृत भी किया और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया। SHS 2021 ने स्वच्छता के उन पहलुओं पर भी ध्यान दिया जो प्रत्यक्ष रूप से कम दिखाई देते हैं। ‘स्थायित्व एवं सुजलाम अभियान’ तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित था। इस अभियान के दौरान घरेलू स्तर पर 15,951 और सामुदायिक स्तर पर 7,216 सोख गड्ढों (सोक पिट्स) का निर्माण किया गया। इस प्रकार, SHS 2021 ने व्यापक स्वच्छता यानी ‘सम्पूर्ण स्वच्छता’ के लिए जन भागीदारी को सशक्त किया। इसने SHS 2022 के विज़ुअल क्लीनलीनेस के मज़बूत आधार को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
स्वच्छता ही सेवा 2022: विजुअल क्लीनलीनेस पर फोकस
SHS 2022 का आयोजन 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक किया गया था। इस अभियान ने गांवों की विज़ुअल क्लीनलीनेस पर ध्यान केंद्रित किया और गांवों के आस-पास डंप किए गए कचरे व अपशिष्ट को लक्षित किया। SHS 2022 का उद्देश्य ODF प्लस गांवों के लिए जन भागीदारी को सुदृढ़ करना था। इसने ‘सम्पूर्ण स्वच्छ’ गांव की अवधारणा को भी बढ़ावा दिया। अभियान ने ‘स्वच्छता हर किसी का काम है’ के सिद्धांत को पुनः दोहराया। इसने विज़ुअल क्लीनलीनेस को कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक प्रबंधन और जलाशयों के आस-पास स्वच्छता जैसे व्यापक स्वच्छता अभ्यासों से जोड़ा। इस दृष्टिकोण ने SBM-G चरण II के तहत सतत ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में हो रहे बदलाव को गति दी।
इस अभियान के तहत नौ राज्यों में यूनाइटेड इंडिया फॉर स्वच्छता गतिविधियां भी शामिल थीं। इसने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 4R सिद्धांत को बढ़ावा दिया: रिफ्यूज़ (मना करना), रिड्यूस (कम करना), रीयूज़ (पुनः उपयोग करना), और रिसाइकिल (पुनर्चक्रण करना)। SHS 2022 ने स्वच्छता जागरूकता फैलाने के लिए कई संचार माध्यमों का उपयोग किया। इनमें वॉल पेंटिंग, नुक्कड़ नाटक, स्वच्छता रथ और सोशल मीडिया सामग्री शामिल थीं। नागरिकों को नो लिटरिंग की शपथ लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन गतिविधियों ने ग्रामीण नेतृत्व को ज़मीनी स्तर की स्वच्छता कार्रवाइयों से जोड़ा।
ग्रामीण भारत में इस अभियान में व्यापक भागीदारी देखी गई। स्वच्छता गतिविधियों के लिए 9.81 करोड़ से अधिक लोगों ने श्रमदान किया। अभियान के दौरान 1.59 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए। लगभग 1.68 लाख सरपंचों ने ODF प्लस घटकों पर आयोजित ‘सरपंच संवाद’ में भाग लिया। इस तरह अभियान ने स्वच्छ परिवेश को सामुदायिक स्वामित्व और सतत अपशिष्ट प्रबंधन से जोड़ा।
स्वच्छता ही सेवा 2023: कचरा-मुक्त भारत की ओर
15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित SHS 2023 का मुख्य विषय (थीम) “कचरा-मुक्त भारत” था। यह अभियान स्वयंसेवा, श्रमदान, दृश्य स्वच्छता और सफाईमित्र कल्याण पर केंद्रित था। इसके लिए 17 सितंबर से सफाईमित्र सुरक्षा शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रयुक्त जल प्रबंधन में कार्यरत सभी स्वच्छता कर्मियों के कल्याण और जीवन स्तर में सुधार करना था।
इस 18 दिवसीय अभियान के दौरान 109 करोड़ से अधिक भागीदारियां दर्ज की गईं। स्वच्छता श्रमदान में लगभग 53 करोड़ लोगों ने भाग लिया, जो प्रतिदिन औसतन लगभग तीन करोड़ श्रमदान प्रतिभागियों के बराबर था। यह अभियान 1 अक्टूबर को “एक तारीख, एक घंटा, एक साथ” के साथ संपन्न हुआ। देश भर में लगभग 9.2 लाख आयोजनों में करीब 8.75 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से 6.8 करोड़ और शहरी क्षेत्रों से 1.95 करोड़ प्रतिभागी शामिल थे।
इस अभियान से सार्वजनिक स्थलों पर प्रत्यक्ष सुधार देखने को मिले। लगभग 7,611 समुद्र तटों की सफाई की गई। 6,371 नदी तटों और जलस्रोतों के किनारों का पुनरुद्धार किया गया। 15,576 से अधिक पुराने कचरा स्थलों (लीगेसी वेस्ट साइट्स) को मुक्त कराया गया। 3,620 पर्यटक और ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति में सुधार हुआ। 1.23 लाख से अधिक सार्वजनिक स्थानों को बहाल किया गया। 16,000 से अधिक जलाशयों की सफाई की गई और कचरा जमा होने की आशंका वाले लगभग 66,779 संवेदनशील स्थलों को साफ किया गया।
इंडियन स्वच्छता लीग 2.0 के ज़रिये युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ा गया। भागीदारी के लिए 4,000 से अधिक शहरी टीमें तैयार की गईं। इन टीमों ने समुद्र तटों, पहाड़ियों और पर्यटन स्थलों की सफाई के लिए रैलियां निकालीं। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति युवाओं में निरंतर स्वामित्व की भावना विकसित करना था।
SHS 2023 ने SBM के ग्रामीण और शहरी दोनों घटकों को एक मंच पर ला दिया। 71 मंत्रालयों और विभागों ने अपने-अपने अनूठे तरीकों से इस अभियान में योगदान दिया। उनकी पहल ने स्वच्छता के प्रयासों को विभिन्न क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचाया। उदाहरण के लिए, पर्यटन मंत्रालय ने 108 चयनित स्थलों पर ‘ट्रैवल फॉर लाइफ (LiFE) फॉर क्लीनलीनेस’ अभियान शुरू किया। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सिनेमाई पर्दों पर SHS वीडियो का प्रसारण किया, जबकि दूरसंचार विभाग ने मोबाइल नेटवर्क पर SHS रिंगटोन बजाई। इस अभियान ने सरकार और समाज के समन्वित प्रयासों से संभव होने वाले व्यापक पैमाने को प्रदर्शित किया। इसके परिणामों ने यह भी दिखाया कि स्वच्छता का दायरा केवल शौचालयों तक सीमित न रहकर अपशिष्ट प्रबंधन और व्यवहार परिवर्तन की दिशा में लगातार बढ़ रहा है।
स्वच्छता ही सेवा 2024: स्वच्छता से स्वभाव की ओर
17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित SHS 2024 ने व्यवहार और सामाजिक मूल्यों की दिशा में एक बड़े बदलाव को रेखांकित किया। इसका मुख्य विषय (थीम) “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” था। अभियान मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित था:
स्वच्छता लक्षित इकाइयों (CTUs – उपेक्षित और गंदे क्षेत्रों) का रूपांतरण, स्वच्छता में जन भागीदारी: स्वच्छता में आम जनता की सहभागिता, सफाईमित्र सुरक्षा शिविर: स्वच्छता कर्मियों का कल्याण
स्वच्छता लक्षित इकाइयां (CTUs) पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करने वाले ऐसे गंभीर रूप से उपेक्षित क्षेत्र थे, जिनकी पहचान की गई थी। कचरा स्थलों या डंपसाइटों जैसे इन क्षेत्रों को विभिन्न क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता अभियानों के दौरान अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था। इस अभियान का उद्देश्य समयबद्ध पहल के माध्यम से इन स्थलों का कायाकल्प करना था। अभियान के तहत 3.10 लाख आवासीय क्षेत्रों का रूपांतरण किया गया। इसने सड़क किनारे के 2.11 लाख सड़क किनारे वाले क्षेत्रों और 56,526 बाज़ार स्थलों का भी पुनरुद्धार किया। अभियान के दौरान 61 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए।
दिलचस्प बात यह है कि SHS 2024 ने पारंपरिक स्वच्छता अभियानों से परे अपनी पहुंच का विस्तार किया। स्वच्छ भारत सांस्कृतिक उत्सवों ने स्वच्छता को स्थानीय कला और संस्कृति से जोड़ा। इन कार्यक्रमों ने सामुदायिक भागीदारी और सफाईमित्रों के योगदान को भी रेखांकित किया। अभियान के दौरान 76,837 स्वच्छ भारत सांस्कृतिक उत्सव दर्ज किए गए। लगभग 15,710 स्वच्छ फूड स्ट्रीट स्थापित की गईं। इस पहल ने वेस्ट-टू-आर्ट गतिविधियों और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को भी बढ़ावा दिया। इस प्रकार, सांस्कृतिक भागीदारी स्वच्छता संदेशों के प्रचार-प्रसार का एक और माध्यम बन गई।
सफाईमित्र सुरक्षा शिविरों ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ाव प्रदान किया। इसने स्वच्छता के अर्थ को और अधिक व्यापक बनाया। इस अभियान ने स्वच्छ परिवेश के साथ-साथ स्वच्छता प्रणालियों को संचालित करने वाले कर्मियों की भलाई दोनों पर ध्यान दिया।
इस आयोजन के दौरान, 1 अक्टूबर 2024 तक 29.21 लाख कार्यक्रम नियोजित किए गए थे। इनमें से 26.44 लाख कार्यक्रम पूरे कर लिए गए। जनभागीदारी 26.25 करोड़ नागरिकों तक पहुंच गई। नागरिकों ने 3.04 लाख स्वच्छता शपथ भी लीं। इस प्रकार, SHS 2024 ने स्वच्छता को आदतों, संस्कारों, सहभागिता और गरिमा के साथ जोड़ा।
स्वच्छता ही सेवा 2025: स्वच्छता को सामुदायिक उत्सवों तक ले जाना
SHS 2025 वर्ष 2024 के व्यवहार-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित था। इसका मुख्य केंद्र बिंदु स्वच्छोत्सव और स्वच्छ त्योहारों की भावना थी। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चला। स्वच्छोत्सव के केंद्र में इसके पांच प्रमुख स्तंभ थे। ये ऐसी केंद्रित पहल थीं जिन्होंने लोगों, स्थानों और उद्देश्यों को एकजुट करके स्वच्छ और हरित भारत की परिकल्पना को ज़मीनी स्तर पर साकार किया।
SHS 2025 के पांच स्तंभ निम्नलिखित थे:–
स्वच्छता लक्षित इकाइयों (CTUs) का रूपांतरण, स्वच्छ सार्वजनिक स्थल, सफाईमित्र सुरक्षा शिविर
स्वच्छ हरित उत्सव, स्वच्छता की वकालत
अभियान के तहत 15.75 लाख CTUs की सफाई की गई। इन गतिविधियों में 7.74 करोड़ प्रतिभागियों ने भाग लिया। अभियान के माध्यम से 6.22 करोड़ नागरिकों की भागीदारी से 5.89 लाख सार्वजनिक स्थलों की भी सफाई की गई। SHS 2025 ने स्वच्छता को सांस्कृतिक आयोजनों से भी जोड़ा। त्योहारों के दौरान समुदायों को संधारणीय प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके परिणामस्वरूप, अभियान में 4.31 लाख से अधिक पर्यावरण-अनुकूल पंडाल, 3.18 लाख से अधिक उत्सव-उपरांत स्वच्छता गतिविधियां और 2.81 लाख से अधिक स्वच्छता रंगोलियां दर्ज की गईं। इस दृष्टिकोण ने स्वच्छता को सामुदायिक उत्सवों का अंग बना दिया।
अभियान ने सफाईमित्र सुरक्षा शिविर पहल को जारी रखा। अभियान के दौरान 2.71 लाख से अधिक शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 5.12 लाख स्वच्छता कर्मियों को सम्मानित किया गया। कर्मियों के लिए 1.63 लाख निवारक स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए और 4.55 लाख पीपीई (PPE) किट वितरित की गईं। कुल मिलाकर, इन शिविरों से 81.51 लाख लाभार्थी लाभान्वित हुए। कई जन-जागरूकता गतिविधियों ने अभियान की सामुदायिक पहुंच का विस्तार किया। कुल 3.27 करोड़ प्रतिभागियों के साथ 29.02 लाख कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजित की गई प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित हैं:
4.09 लाख स्वच्छता रैलियां, 1.01 लाख वेस्ट-टू-आर्ट कलाकृतियां, 2.47 लाख स्वच्छता प्रतियोगिताएं, 93,145 खेल लीग, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ 3.64 लाख अभियान, 15.94 लाख घर-घर जागरूकता गतिविधियां, 92,971 स्वच्छ फूड स्ट्रीट
कुल मिलाकर, SHS 2025 में देशभर से 18.06 करोड़ लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। इस प्रकार, SHS 2025 ने स्वच्छता को केवल सफाई गतिविधियों से आगे बढ़ाकर सामुदायिक उत्सवों और स्थायी अभ्यासों तक विस्तारित किया।
स्वच्छता से परे : दैनिक व्यवहार को गढ़ना
SHS की विकास यात्रा स्वच्छता के अर्थ में निरंतर विस्तार को दर्शाती है। शुरुआती संस्करणों का ध्यान स्वच्छता कार्यों और स्वयंसेवा पर केंद्रित था। बाद के संस्करणों ने प्लास्टिक कचरे, दृश्य स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को केंद्र में रखा। यह बदलाव 2023 के बाद से और अधिक स्पष्ट हो गया। “कचरा-मुक्त भारत” ने सार्वजनिक स्थलों और अपशिष्ट प्रबंधन की ओर ध्यान बढ़ाया। वर्ष 2024 की थीम ने स्वच्छता को स्वभाव और संस्कार से जोड़ा। वर्ष 2025 में स्वच्छोत्सव ने स्वच्छता को त्योहारों और सामुदायिक आयोजनों में समाहित किया।
वर्ष 2026 में, स्वच्छता में सहभाग सामूहिक प्रयास और सहयोग को केंद्र में रखता है। यह अभियान केवल भौतिक स्थलों की सफाई से आगे बढ़कर निरंतर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने, दैनिक जीवन में स्वच्छता को समाहित करने और एक साझा सामुदायिक दायित्व की भावना को सुदृढ़ करने के रूप में विकसित हुआ है।
