पोषण माह के तहत सिमडेगा में गांव-गांव चल रहा जागरूकता अभियान

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तिरंगा भोजन के जरिए संतुलित आहार का संदेश

AMIT RANJAN

सिमडेगा: जिले में पोषण माह 9 सितम्बर से 8 अक्टूबर के अवसर पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के अंतर्गत गठित एवं संचालित सभी ग्राम संगठनों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पोषण जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं एवं परिवारों को संतुलित आहार, पौष्टिक भोजन, एनीमिया की रोकथाम, कुपोषण से बचाव तथा बच्चों के समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। ग्राम संगठन एवं स्वयं सहायता समूहों की बैठकों में पोषण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान तिरंगा भोजन के माध्यम से भी पोषण का संदेश दिया जा रहा है। हरे, सफेद और नारंगी रंग के प्राकृतिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों से तैयार विभिन्न पौष्टिक व्यंजनों के जरिए यह बताया जा रहा है कि संतुलित एवं पौष्टिक भोजन के लिए महंगे खाद्य पदार्थों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज, दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल-सब्जियां, कंद-मूल, चना, गुड़, तिल एवं अन्य पोषक खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन में शामिल कर परिवार के पोषण स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है।

बैठकों में संतुलित भोजन की थाली में अनाज के साथ पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल तथा अन्य आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण, बच्चों के पहले 1000 दिनों के महत्व, छह माह तक केवल स्तनपान तथा छह माह के बाद उचित पूरक आहार की शुरुआत के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही किशोरियों एवं महिलाओं में एनीमिया की समस्या को लेकर जागरूक करते हुए आयरन एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के महत्व के बारे में भी बताया जा रहा है। जेएसएलपीएस के सामुदायिक संस्थानों से जुड़ी महिलाएं अपने-अपने गांवों में पोषण संबंधी संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बैठकों में स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, बच्चों के भोजन में विविधता लाने तथा परिवार में स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने पर चर्चा की जा रही है। अभियान का उद्देश्य केवल पोषण संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों में व्यवहार परिवर्तन लाकर स्वस्थ एवं पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। सिमडेगा जैसे ग्रामीण एवं आदिवासी बहुल जिले में स्थानीय खाद्य संसाधनों को पोषण से जोड़ते हुए चलाया जा रहा यह अभियान महिलाओं की सहभागिता के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रहा है। पोषण माह के दौरान ग्राम संगठनों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आयोजित विभिन्न गतिविधियों से ग्रामीण समुदाय को “सही पोषण, स्वस्थ परिवार” का संदेश दिया जा रहा है और परिवारों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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