दक्षिण पूर्व रेलवे की 6 किमी लंबी बड़बिल-बोलानीखदान दोहरीकरण परियोजना के लिए भारतीय रेल ने 122 करोड़ की मंजूरी दी

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बढ़ते लौह अयस्क परिवहन को सुगम बनाने, खनिज कॉरिडोर को मजबूत करने और भविष्य की क्षमता आवश्यकताओं को पूरा करने में मिलेगी मदद

Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: भारतीय रेल ने दक्षिण पूर्व रेलवे की 6 किमी लंबी बड़बिल–बोलानीखदान दोहरीकरण परियोजना को 122 करोड़ रुपये की पूर्णता लागत के साथ मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना एक महत्वपूर्ण खनिज परिवहन कॉरिडोर पर रेल अवसंरचना को मजबूत करेगी। परियोजना के पूरा होने के बाद इस खंड पर 8.9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल यातायात का परिचालन संभव हो सकेगा। दोहरीकरण से मालगाड़ियों के विलंब में भी कमी आएगी।

बड़बिल–बोलानीखदान खंड को भारतीय रेल के “ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर” के अंतर्गत चिन्हित किया गया है। वर्तमान में यह खंड एकल लाइन वाला है और यहां लगभग 9 MTPA माल यातायात होता है, जिसमें प्रतिदिन लगभग 6 लोडेड रेक मूल रूप से लौह अयस्क का परिवहन करते हैं। इस मार्ग से मुख्य रूप से SAIL की बोलानी खदानों तथा निजी साइडिंग्स (रुंगटा, खटाऊ नरभेराम) से उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क एवं पेलेट्स का परिवहन प्रमुख इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों तक किया जाता है। SAIL की खदानों के विस्तार तथा बंदरगाहों और संयंत्रों की क्षमता में वृद्धि के पूर्ण रूप से साकार होने से पहले इस 6 किमी लंबे खंड का दोहरीकरण निर्धारित खनिज कॉरिडोर में संभावित क्षमता संबंधी बाधाओं को रोकने में मदद करेगा।

स्वीकृत परियोजना बढ़ती माल परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने, इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों तक लौह अयस्क की आवाजाही के लिए रेल संपर्क को बेहतर बनाने तथा क्षेत्र में खनन, औद्योगिक और बंदरगाह गतिविधियों के विस्तार के साथ रेल क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक होगी। इससे ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर और मजबूत होगा तथा इस महत्वपूर्ण मार्ग पर माल यातायात की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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