रांची: रांची स्थित जे.ई. धुंजीभॉय अकादमिक एवं अनुसंधान केंद्र, रिनपास में सोमवार को जेनडर,मेंटल हेल्थ और इनक्लूसीव प्रेक्टिसेस फॉर सीएसओएस विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सोमवार को किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सीएनएनआई झारखंड की ओर से तथा रिनपास के तकनीकी सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ रिनपास के अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी एवं शोधार्थी सहित विभिन्न हितधारकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य लैंगिक समानता, विविधता, सामाजिक समावेशन, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण के बीच संबंधों को समझना तथा समुदायों के साथ अधिक संवेदनशील, सम्मानजनक और समावेशी तरीके से कार्य करने की क्षमता को मजबूत करना था। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को भेदभाव, सामाजिक बहिष्करण एवं मानसिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव के साथ-साथ संवेदनशील संवाद, सहमति, गोपनीयता, उचित रेफरल एवं फॉलो-अप जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फकठढअर की निदेशक ने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण केवल विभिन्न लोगों को एक स्थान पर एकत्र करने तक सीमित नहीं है। निदेशक ने मानसिक स्वास्थ्य को भी समावेशन के साथ जोड़ते हुए कहा कि भेदभाव, हिंसा, सामाजिक दबाव, कलंक और बहिष्करण किसी व्यक्ति के भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करने, संवेदनशीलता विकसित करने तथा जरूरतमंद व्यक्ति को उचित सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि विविधता समाज को जोड़ती है, समावेशन अपनत्व की भावना विकसित करता है और सहानुभूति एक-दूसरे को समझने में सहायता करती है। इस प्रकार लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और समावेशी कार्यप्रणालियों को एक साथ अपनाकर अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगी समुदायों का निर्माण किया जा सकता है।प्रशिक्षण में लगभग 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की कार्यपद्धति संवादात्मक एवं व्यवहारिक रही, जिसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, सहभागी गतिविधियां, केस स्टडी, समूह चर्चा, परिस्थितिजन्य अभ्यास, आत्म-मूल्यांकन एवं एक्शन प्लानिंग को शामिल किया गया।
