डॉक्टरों का आंदोलन टलने की उम्मीद, अपर मुख्य सचिव के साथ वार्ता सकारात्मक

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रांची। झारखंड में डॉक्टरों के प्रस्तावित राज्यव्यापी आंदोलन के टलने की उम्मीद बढ़ गई है। सोमवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में झासा, आईएमए समेत 10 चिकित्सा संगठनों के संयुक्त मंच के साथ बैठक हुई। वार्ता का रुख सकारात्मक रहा।बैठक के बाद चिकित्सा संगठनों ने कहा कि पूजा के दौरान कार्य बहिष्कार टालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। शुक्रवार को फिर से वार्ता होगी, जिसमें शेष मांगों पर निर्णय होने की उम्मीद है।गौरतलब है कि 10 चिकित्सा संगठनों ने डायनेमिक एसीपी, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत 20 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर इलाज, 21 अक्टूबर को सांकेतिक हड़ताल और 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया गया था। इस आंदोलन में जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों के करीब 20 हजार डॉक्टरों के शामिल होने की बात कही गई थी।सोमवार की बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव संदीप कुमार दोराईबुरू, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, झासा अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह, सचिव डॉ. मृत्युंजय, एएचपीआई अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार और डॉ. शंभू प्रसाद सिंह समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।बैठक में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में शहरी क्षेत्र में 50 और ग्रामीण में 30 बिस्तर की सीमा तय करने, केंद्र और बिहार की तर्ज पर डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन लागू करने, मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग प्रमुखता से उठी। आयुष्मान भारत योजना के तहत टियर-2 शहरों के लिए अलग भुगतान दर की मांग पर भी चर्चा हुई।अपर मुख्य सचिव ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अन्य मांगों पर नियमानुसार विचार का आश्वासन दिया है। शुक्रवार की बैठक को निर्णायक माना जा रहा है।

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