Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) में नेतृत्व को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दिल्ली एमेच्योर बॉक्सिंग संघ के उपाध्यक्ष रोहित जैन ने महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह की ओर से जारी उस परामर्श को चुनौती दी है, जिसमें संबद्ध राज्य संघों को 28 अक्टूबर को प्रस्तावित विशेष आम बैठक में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई थी। जैन ने राज्य संघों से बैठक में अपने प्रतिनिधि भेजने और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने की अपील की है। रोहित जैन और दिल्ली एमेच्योर बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष नीरज जैन ने 19 अक्टूबर को संबद्ध राज्य संघों को पत्र लिखकर महासंघ के परामर्श पर सवाल उठाए। यह पत्र बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह की ओर से 18 अक्टूबर को जारी उस परामर्श के जवाब में भेजा गया, जिसमें राज्य संघों से 28 अक्टूबर की प्रस्तावित विशेष आम बैठक के लिए प्रतिनिधियों को नामित नहीं करने और बैठक में शामिल नहीं होने को कहा गया था। परामर्श में यह चेतावनी भी दी गई थी कि बैठक में भाग लेने या उसका समर्थन करने वाले संघों के खिलाफ महासंघ के संविधान के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली संघ ने इस चेतावनी के संवैधानिक आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि संबद्ध राज्य संघों को महासंघ की निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है। संघ का तर्क है कि बहुमत वाले राज्य संघों की लिखित मांग और महासंघ के महासचिव प्रमोद कुमार की ओर से 8 अक्टूबर को जारी नोटिस के बाद बैठक की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि 16 अक्टूबर को कार्यकारी समिति के सदस्यों ने प्रस्तावित बैठक का समर्थन किया था। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बीएफआई संविधान की धारा 32(ii) की व्याख्या है। अजय सिंह के परामर्श में इस धारा का हवाला देते हुए विशेष आम बैठक बुलाने का अधिकार अध्यक्ष के पास होने की बात कही गई है। इसके विपरीत, दिल्ली संघ का कहना है कि जब अध्यक्ष के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा हो, तब उन्हें महासंघ की आम सभा को इस मुद्दे पर विचार करने से एकतरफा रोकने का अधिकार नहीं होना चाहिए। दिल्ली संघ ने महासचिव प्रमोद कुमार को निलंबित बताए जाने पर भी आपत्ति जताई है। संघ के अनुसार, निर्वाचित महासचिव को एकतरफा निलंबित करने का अधिकार अध्यक्ष के पास नहीं है और ऐसी कार्रवाई निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार की ओर से जारी परस्पर विरोधी निलंबन आदेशों की वैधता भी विवाद का विषय बनी हुई है। पत्र में दिल्ली उच्च न्यायालय में बीएफआई के संवैधानिक संशोधनों और 21 अगस्त 2025 को हुए चुनावों से संबंधित लंबित कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। इन चुनावों में अजय सिंह दोबारा अध्यक्ष चुने गए थे। दिल्ली संघ का कहना है कि महासंघ के संचालन से जुड़े कानूनी सवालों का समाधान होने तक संबद्ध सदस्यों को प्रभावित करने वाले फैसलों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जानी चाहिए।
दिल्ली संघ ने 19 नवंबर 2025 को अजय सिंह के खिलाफ कथित रूप से लाए गए पहले अविश्वास प्रस्ताव का भी जिक्र किया है। इसके अलावा, संघ ने वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक हस्तक्षेप और नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले राज्य संघों के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर चिंता जताई है। रोहित जैन और दिल्ली एमेच्योर बॉक्सिंग संघ ने राज्य संघों से 18 अक्टूबर के परामर्श को नजरअंदाज करने, महासचिव के कार्यालय में अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजने और 28 अक्टूबर की बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का आग्रह किया है। संघ ने यह भी कहा है कि बैठक में भाग लेने वाले सदस्यों के खिलाफ किसी भी प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का मामला युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और संबंधित न्यायिक प्राधिकरणों के समक्ष उठाया जाएगा। इस पत्र की प्रतियां भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा, खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण और विश्व मुक्केबाजी के अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। बीएफआई में अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार के बीच अधिकारों को लेकर विवाद जारी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के अधिकारों पर सवाल उठा रहे हैं और प्रस्तावित विशेष आम बैठक की वैधता भी विवादित बनी हुई है। 28 अक्टूबर की बैठक से पहले यह मामला राज्य संघों के अधिकारों, निर्वाचित पदाधिकारियों की शक्तियों और महासंघ के संवैधानिक प्रावधानों के पालन पर केंद्रित हो गया है। इस विवाद का असर भारतीय मुक्केबाजों और प्रशिक्षकों के हितों पर न पड़े, यह भी एक अहम चिंता बनी हुई है।
