व्यापार दोगुना करेंगे भारत-पोलैंड, दुर्लभ खनिज व रक्षा क्षेत्र में करेंगे सहयोग

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: भारत और पोलैंड 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करेंगे। पोलैंड भारत की पहल ‘कोलिशन फॉर डिजास्टर रेसिलियंस इंफ्रास्ट्रक्चर’ से जुड़ेगा। दोनों देश रक्षा उद्योग तथा आतंकवाद विरोधी संवाद स्थापित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार के दोगुना होने से रोजगार सृजन और नए अवसर बढ़ेंगे। विकास, निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के बीच रक्षा संवाद स्थापित होने से क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा। इसके माध्यम से दोनों देश विकास एवं सह-उत्पादन से जुड़े अवसर तलाशेंगे। रक्षा क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा सप्लाई चैन मजबूत होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच गुरुवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। वार्ता को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी में एक नया चरण है। गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच व्यापक वार्ता हुई है। वर्ष 2024 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण खनिजों और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशे, साथ ही व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान के माध्यम से संबंधों को और गहरा किया। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के महत्व पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थानों के सुधार और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित: पोलैंड के प्रधानमंत्री की यात्रा पर आयोजित विशेष ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत और पोलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर का है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। दोनों देश इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, अभिलेखागार, संस्कृति, विज्ञान और उच्च शिक्षा से जुड़े समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पोलिश कंपनियों को मेक इन इंडिया कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। पोलैंड ने सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई है। उन्होंने इन क्षेत्रों में सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए पोलैंड की कंपनियों को भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया। यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति की दिशा में किए जाने वाले हर सार्थक प्रयास का समर्थन करता रहेगा। मोदी ने कहा कि भारत और पोलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानवता और संवेदना की साझा विरासत पर आधारित हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजपरिवारों ने पोलैंड के हजारों बच्चों एवं परिवारों को भारत में आश्रय दिया था। उन्होंने सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि पोलैंड में संस्कृत अध्ययन और भारतविद्या की समृद्ध परंपरा है। क्राकोव शहर में भारतीय अध्ययन पीठ की स्थापना भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने का प्रयास है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत के साथ महत्वपूर्ण खनिजों, रणनीतिक संसाधनों, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत है। टस्क ने मोदी के साथ वार्ता के बाद कहा कि भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की नींव आर्थिक संबंध हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल में कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। दोनों देश खनन, गैस, जहाज निर्माण, उपग्रह, डिजिटल तकनीक और ड्रोन के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी लक्ष्य साझा करते हैं। उन्होंने जी-20 जैसे मंचों पर परस्पर सहयोग की उम्मीद भी जताई।

भारत-कनाडा के बीच शिक्षा और शोध सहयोग पर चर्चा, एमओयू को लागू करने पर जोर: भारत और कनाडा के बीच शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बातचीत हुई है। शिक्षा मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा के संबंधों को फिर से मजबूत करने, शोध साझेदारी का विस्तार करने और छात्रों के लिए एक-दूसरे के देश में पढ़ाई के अवसर बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर और ट्रेड कमिश्नर एमी एंटोनिनी के साथ शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी की हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बातचीत के दौरान घोषित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) को लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में भारत और कनाडा के शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने और शोध के क्षेत्र में नई साझेदारियां विकसित करने पर विचार किया गया। दोनों देशों के बीच छात्रों की आवाजाही को आसान बनाने और उन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, भारत में कनाडा के विश्वविद्यालयों के लिए अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इस संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत कनाडा के विश्वविद्यालयों की भारत में मौजूदगी और उनके लिए सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बातचीत के दौरान घोषित समझौता ज्ञापनों को आगे बढ़ाना और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना रहा। इसके जरिए दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संबंधों को नई गति देने की कोशिश की जा रही है। बैठक के बाद जारी संदेश में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इस पहल से भारत और कनाडा के विश्वविद्यालयों के बीच संपर्क बढ़ाने, साझा शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने और शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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