Eksandeshlive Desk
काठमांडू: नेपाल को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी सगरमाथा (माउंट एवरेस्ट) के देश के रूप में जाना जाता है। नेपाल की आठ पर्वत चोटियों को पहले ही 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पर्वतों के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल चुकी है। अब नेपाल ने अपनी छह और चोटियों को इसी श्रेणी में शामिल कराने के लिए औपचारिक पहल की है। काठमांडू में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण एवं पर्वतारोहण संघ (यूआईएए) की आमसभा के उद्घाटन सत्र में नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के सामने यह प्रस्ताव रखा। इस आमसभा में 45 देशों के 95 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। नेपाल इससे पहले वर्ष 1982 और 2011 में भी यूआईएए की आमसभा की मेजबानी कर चुका है। नेपाल पर्वतारोहण संघ (एनएमए) के अध्यक्ष फुर्बा ग्याल्जे शेर्पा ने आमसभा में इन छह चोटियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने एक अध्ययन रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें प्रत्येक चोटी को 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्वतंत्र पर्वत के रूप में मान्यता देने के आधार बताए गए हैं।
नेपाल के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी: शेर्पा ने बताया कि एनएमए ने इन पर्वत चोटियों की पहचान और ऊंचाई मापने के लिए एक अध्ययन दल गठित किया था। अध्ययन दल ने प्रत्येक चोटी की अलग भौगोलिक पहचान, स्वतंत्र शिखर और अलग पर्वतारोहण मार्ग होने के प्रमाण जुटाए हैं। यदि इन सभी छह चोटियों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल जाती है, तो नेपाल में 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले मान्यता प्राप्त पर्वतों की संख्या बढ़कर 14 और दुनिया में ऐसे पर्वतों की कुल संख्या 20 पहुंच जाएगी। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री खड्गराज पौडेल ने कहा कि दुनिया के 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले 20 पर्वतों में से 14 का नेपाल में होना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी। मंत्री पौडेल के अनुसार इससे नेपाल दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों के प्रमुख केंद्र के रूप में और स्थापित होगा। साथ ही पर्वतारोहण, साहसिक पर्यटन, अनुसंधान, पर्वतीय अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के नए अवसर खुलेंगे। मंत्री पौडेल ने फेसबुक पर लिखा, ”नेपाल का यह प्रस्ताव केवल पर्वतों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह तथ्यों, अध्ययन और वैज्ञानिक आधार के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हमारी हिमालयी भौगोलिक पहचान, प्राकृतिक विरासत और पर्वतीय विशिष्टता स्थापित करने का प्रयास भी है।”
छह चोटियों की ऊंचाई: यालुंग कांग-8,505 मीटर, कंचनजंघा साउथ-8,476 मीटर, कंचनजंघा सेंट्रल-8,473 मीटर, ल्होत्से मिडिल-8,410 मीटर, ल्होत्से शार-8,400 मीटर, यालुंग कांग वेस्ट-8,077 मीटर।
