भारत गुयाना को 50 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा देगा

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज एंटीगुआ और बारबुडा में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) के दौरान गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफ़ान अली से मुलाकात की। इस दौरान विदेश मंत्री ने गुयाना की विकास प्राथमिकताओं और अवसंरचना परियोजनाओं के समर्थन के लिए भारत द्वारा 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर की नई ऋण रेखा (लाइन ऑफ क्रेडिट) के विस्तार की भी घोषणा की। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) विनिर्माण परियोजनाओं की आपूर्ति एवं स्थापना, त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी) के कार्यान्वयन के लिए अनुदान सहायता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के क्षेत्र में सहयोग और गुयाना में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) जैसी प्रणाली का संचालन शामिल है।

वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की गुयाना यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में आई प्रगति की समीक्षा की गई। भारत ने गुयाना को कई सहयोग देने की घोषणा की। इनमें 50 करोड़ डॉलर (लाइन ऑफ क्रेडिट), सूक्ष्म और लघु उद्यम, ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ के क्रियान्वयन के लिए विशेष सहायता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और गुयाना में यूपीआई जैसी प्रणाली के संचालन में सहयोग को लेकर समझौते शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम 2026) के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक, तकनीकी और आपदा प्रबंधन साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें की और राष्ट्रमंडल देशों के व्यापारिक नेताओं को संबोधित किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार डॉ जयशंकर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सीईटीए के तहत भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इसके अलावा, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. इरफान अली, एंटीगुआ और बारबुडा के गवर्नर जनरल सर रॉडनी विलियम्स से भी मुलाकात की।

राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्षों और व्यापारिक नेताओं की नाश्ता बैठक में विदेश मंत्री ने आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल विकास पर जोर दिया। इस दौरान प्रमुख बातों में आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कनेक्टिविटी कॉरिडोर व्यापार के लिए फायदेमंद हैं। राष्ट्रमंडल के भीतर कौशल गतिशीलता एक प्रमुख फोकस क्षेत्र हो सकता है। दुनिया भर में फैला भारतीय व्यापार समुदाय राष्ट्रमंडल की वैश्विक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर दक्षता, सुशासन और समावेशी विकास को गति देने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है।

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