आउटसोर्सिंग कंपनी की आड़ में अपना एजेंडा साधने में लगे हैं कुलपति : आजसू

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पांच दिनों से रांची विवि के परीक्षा विभाग में तालाबंदी

रांची : प्रतिनिधिमंडल रांची विश्वविद्यालय के अध्यक्ष अभिषेक शुक्ला ने कहा कि विगत 1 वर्ष पहले रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को निजी कंपनी एनसीसीएफ के हाथों में सौंप दिया गया और रांची विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा कहा गया इस एजेंसी के आने के बाद परीक्षा विभाग में किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ी नहीं होगी और सभी चीजों में प्रदर्शित होगी । लेकिन जब से इस एजेंसी ने काम संभाला है तब से रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की स्थिति बद से बस्तर हो गई है। परीक्षा फॉर्म भरते समय निजी कंपनी का सर्वर क्रैश कर जाता है और दो-तीन दिन तक विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाते हैं। परीक्षा हुई 8 व 9 महीने हो जा रहे हैं लेकिन यह एजेंसी परीक्षा पर प्रकाशित करने में समर्थ रह रहा है जिससे कि छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वहां आगे की पढ़ाई के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं। विगत एक सालों में इस एजेंसी द्वारा अनेक प्रकार की गड़बड़ियां रिजल्ट प्रकाशित करने में की गई है जैसे की डोरंडा कॉलेज की छात्रा छात्राओं ने एग्जाम दिया उन सभी छात्र-छात्राओं को अनुपस्थित दिखाकर उसे विषय में फेल कर के सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया गया बाद में जब उस छात्र ने अपने सेंटर से जाकर अटेंडेंस शीट निकलवाया तो उसमें वह प्रेजेंट दिख रही है। इसी तरह हाल ही में यूजी सेमेस्टर वन मारवाड़ी महाविद्यालय के रिजल्ट को बिना प्रैक्टिकल एग्जाम के मार्क्स दिए ही जारी कर 877 छात्र-छात्राओं को फेल कर दिया गया, मांडर महाविद्यालय में वाणिज्य विभाग में 58 छात्र-छात्राओं को बिना इंटरनल परीक्षा लिए हैं परीक्षाफल प्रकाशित कर उन सब को फेल कर दिया गया। पीजी साइंस प्रैक्टिकल की कॉपी जाचे बिना ही रिजल्ट निकाल दिया गया। रांची विश्वविद्यालय अंतर्गत 19 नर्सिंग कॉलेज के 2000 छात्रों के मूल्यांकन में गड़बड़ी की गई छात्र-छात्राओं के हंगामे के बाद 2000 छात्र-छात्राओं के उत्तर पुस्तिका को फिर से जांच कर परीक्षाफल प्रकाशित किया गया। आए दिन किसी ने किसी वजह से यह प्राइवेट एजेंसी सुर्खियों में बनी रहती है एवं छात्र-छात्राएं जब अपनी समस्या लेकर वहां जाते हैं तो उनसे कंपनी के स्टाफ दुर्व्यवहार करते हैं, अभिषेक शुक्ला आगे कहां जो कंपनी रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा विभाग का काम देख रही है उसे 2003 में ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था फिर भी उसे रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग का काम दिया गया पूर्व में इस कंपनी (एजेंसी) पर पैसे लेकर डिग्री छाप कर बेचने का आरोप भी लगा है ऐसी कंपनी को कुलपति महोदय ने कैसे इतनी बड़ी जिम्मेवारी सौंपी जबकि रांची विश्वविद्यालय राज्य का एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसके पास ईडीपीसी के रूप मे रिजल्ट प्रकाशित करने के सारे साधन मौजूद है फिर भी विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा परीक्षा विभाग का निजी हाथों में सौंप दिया गया इसमें कहीं ना कहीं धांधली की बू आती है। पूर्व में भी इस कंपनी द्वारा पैसे लेकर डिग्री बेचने का आरोप लगा है और अभी भी यह यही काम करने में व्यस्त है जिसके कारण रांची विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है अगर इस कंपनी पर जल्द से जल्द कार्रवाई कर इसे रांची विश्वविद्यालय से नहीं हटाया गया तो छात्र आजसू के सदस्य आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वहीं युवा नेता राहुल तिवारी ने कहा कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा में भारी अनियमितता बरती गई है। अभ्यर्थियों को न बुकलेट मिला न कार्बन कॉपी जिस कारण उन्हें पता नहीं चल सका कि कितने अंक का सही बनाए हैं कितने अंक का गलत। आंसर की भी नहीं जारी किया और आपत्ति दर्ज करने का अवसर भी नहीं मिला। आरक्षित वर्ग का कैटिगरी वाइज रिजल्ट भी नहीं निकला। परीक्षा केंद्र पर नाही किसी का आईडी प्रूफ चेक किया गया और नाही एडमिट कार्ड और अटेंडेंस शीट पर पर फोटो था यह साफ साफ दशार्ता है की परीक्षा के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की गई है। छात्र आजसू के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि अगर इस प्राइवेट एजेंसी को जल्द से जल्द रांची विश्वविद्यालय से नहीं हटाया गया तो छात्र आजसू रांची विश्वविद्यालय मे मजबूरन उग्र आंदोलन करेगी इसके जिम्मेदार रांची विश्वविद्यालय के कुलपति होंगे।