बारीडीह में गूंजा मां भगवती का जयघोष, 1100 कलशों के साथ उमड़ा आस्था का जनसैलाब

Religious

Eksandeshlive Desk

मेसरा (रांची) : ओरमांझी प्रखंड के बारीडीह स्थित प्राचीन देवी मड़ई में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था देवी मड़ई में पवित्र त्रिशूल की प्रतिस्थापना हेतु आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का। शुक्रवार को जब 1100 कलशों के साथ श्रद्धालु सड़कों पर निकले, तो पूरा बारीडीह क्षेत्र भगवा रंग और माता के जयकारों से सराबोर हो गया। स्वर्णरेखा तट पर हुआ गंगा पूजन-अनुष्ठान के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई। देवी मड़ई से शुरू होकर यह यात्रा स्वर्णरेखा नदी के तट पर पहुंची। यहां मुख्य आचार्य शैलेंद्र मिश्र, अमित मिश्र और पुजारी बाबूराम पाहन के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने नदी से कलश में जल भरा और पुनः जयघोष करते हुए मंदिर प्रांगण पहुंचे, जहां कलशों को स्थापित किया गया।

भक्ति और नारों से गुंजायमान हुआ वातावरण : कलश यात्रा के दौरान भक्तों का उत्साह चरम पर था। “देवी मईया की जय”, “मां दुर्गा की जय” और “जय हनुमान” के गगनभेदी नारों से समूचा आकाश गुंजायमान रहा। शंखध्वनि और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया। इस पुनीत कार्य में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहु, पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, डॉ. पारसनाथ महतो और जिपस सरिता देवी सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। नेताओं ने मां के दरबार में मत्था टेक क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष मानकी राजेन्द्र साही, सचिव सिकन्दर महतो, कोषाध्यक्ष विजय महतो सहित पूरी टीम और पाहन-मुण्डा समाज के सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से कलश यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हुई। मुख्य अतिथि व उपस्थित गणमान्य जयगोविंद साहु, शशि मिश्रा, अनिल महतो, ललिता देवी, अनुराधा मुण्डा, आरती कुजूर, अमरनाथ चौधरी, शंकर गुप्ता, सत्यनारायण तिवारी, दुर्गा शंकर साहु, बनवारी लाल साहु सहित सैकड़ों ग्रामीण। आयोजन समिति के अनुसार, त्रिशूल स्थापना के साथ-साथ अगले दो दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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