भाजपा को नदियों की नहीं, अपनी राजनीति की चिंता: कांग्रेस

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रांची: भाजपा सरकार की कथनी और करनी में हमेशा से फर्क रहा है। आज जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री संजय सेठ स्वर्णरेखा नदी के तट पर जाकर जलाभिषेक के लिए जल इकट्ठा कर रहे हैं, तब सच्चाई यह है कि भाजपा गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों को भी अब तक साफ नहीं कर सकी। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद लगभग 18 वर्षों तक भाजपा का शासन रहा, लेकिन उस दौरान राज्य की नदियों के संरक्षण और सफाई पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। आज हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार नदियों के संरक्षण और सफाई के लिए निरंतर प्रयासरत है। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने नमामि गंगे जैसी योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए, पर परिणाम शून्य रहा। गंगा और यमुना पहले से अधिक प्रदूषित हैं। वहीं अडानी-अंबानी जैसे पूंजीपतियों के कारखानों से निकलने वाला जहरीला कचरा रोजाना नदियों में बहाया जा रहा है, और केंद्र सरकार उस पर आंख मूंदे बैठी है। अब वही भाजपा सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर 25 नदियों के जल से जलाभिषेकह्व कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है। यह श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सत्ता की राजनीति का दिखावा है। सरदार पटेल जैसे महान राष्ट्रनायक का नाम लेकर भाजपा जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है। अगर भाजपा को सच में नदियों के संरक्षण की चिंता होती, तो आज झारखंड की स्वर्णरेखा, कोयल और दामोदर जैसी नदियाँ प्रदूषण से नहीं कराह रहीं होतीं। जल संगम के नाम पर फोटो खिंचवाने से नदियाँ साफ नहीं होंगी । इसके लिए नीयत साफ करनी होगी। भाजपा की राजनीति ने जल, जंगल और जमीन — तीनों को प्रदूषित कर दिया है। जनता अब इन दिखावटी आयोजनों को भलीभांति समझ चुकी है।भाजपा के लिए जल संरक्षण नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण ही प्राथमिकता बन चुकी है।

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